प्रदेश में 46 दवाओं की खुली बिक्री पर पाबंदी लग गई है। इनमें एंटीबॉयोटिक, साइकोट्रापिक और एंटी टीबी ड्रग्स शामिल हैं।
ये दवा शेड्यूल एच-1 में शामिल की गई हैं। इसीलिए इनकी खुली बिक्री पर रोक लगी है। परिवार कल्याण मंत्रालय ने यह निर्देश जारी किए हैं।
अब उद्योगों को इन दवाओं की पैकिंग के समय लाल रंग से आरएक्स लिखना जरूरी होगा, ताकि पता चल सके की दवाओं की खुली खरीद नहीं हो सकती।
इसके अलावा केवल पंजीकृत डॉक्टर की पर्ची से ही दवाएं मार्केट में मिलेंगी। इसका केमिस्ट को करीब दो साल तक रिकॉर्ड रखना होगा।
रखना होगा मरीज का यह रिकॉर्ड
इसमें मरीज तथा डॉक्टर का नाम और पता, दवा बेचने की तिथि, चालान नंबर के अलावा और डॉक्टर की पर्ची की फोटोस्टेट कापी शामिल होगी। इसके लिए अलग रजिस्टर केमिस्ट को बनाना अनिवार्य होगा।
साइकोटोपिक की कुछ दवाओं में यह निर्देश पहले ही थे। एंटीबायोटिक और एंटी टीबी दवाओं में यह नए निर्देश हैं। अनियमितता पाए जाने पर दवा बेचने का लाइसेंस रद्द हो सकता है।
इसलिए खुली बिक्री पर प्रतिबंध
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक एंटीबायोटिक, टीबी और नींद की दवाओं की बिक्री में कई गुणा इजाफा लोगों को गंभीर बीमारियों की तरफ धकेल रहा है।
एंटीबायोटिक के अत्यधिक सेवन से प्रतिरोधक क्षमता में कमी, टीबी रोग की दवा की ओपन मार्केट में धड़ल्ले से बिक्री और नींद की दवा नशे की तरह इस्तेमाल होने से कई बीमारियां हो रही हैं।