लोगों ने खेतों में सब्जियां उगाना तक छोड़ दीं हर्षित शर्मा
शिमला। शहर के पास बरमू में स्थित स्नोडन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से गंदा पानी पास के छोटे से नाले में छोड़ने से क्षेत्र के लोग परेशान हैं। इस नाले पर बनी पेयजल परियोजना से लोगों को पानी की आपूर्ति की जाती है।
लोगों ने इस कारण संक्रमण फैलने का खतरा जताया है। बरमू क्षेत्र के लोग मंगलवार को इस मामले को लेकर उपायुक्त शिमला से भी मिलने गए थे लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। वर्ष 2005 में बरमू गांव के पास एक एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया था। शुरू में प्लांट सही तरीके से पानी का उपचार कर रहा था लेकिन जनसंख्या बढ़ने के बाद प्लांट में दिक्कतें आती गई हैं।
विज्ञापन
लोगों के मुताबिक अब प्लांट से छोड़ा जा रहा पानी साफ नहीं है। जहां पानी छोड़ा जाता है वहां से 10 किलोमीटर दूर जल शक्ति विभाग की पेयजल परियोजना भी है। इससे कई पंचायतों के लिए पीने का पानी दिया जाता है। प्लांट में लंबीधार से लेकर कैथू इलाके के सीवरेज का उपचार होता है। प्लांट में पहुंच रहे पानी में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज से निकलने वाले रसायन भी बह कर स्नोडन प्लांट बरमू पहुंच रहे हैं। गंदगी का देखते हुए स्थानीय लोगों ने इलाके में खेती तक करना छोड़ दी है। प्लांट के पास उग रही घास भी मवेशी नहीं खा रहे है। खेत बंजर पड़े हैं।
प्लांट करवा रहे हैं अपग्रेड
प्लांट का संचालन कर रहे कनिष्ठ अभियंता नवनीत डोगरा ने बताया कि प्लांट की रेट्रोफीटिंग का काम किया जा रहा है। प्लांट में 0.675 एमएलडी के दो टैंक हैं लेकिन प्लांट में कोई भी स्टैंड बाय यूनिट नहीं है। इस कारण पहले एक टैंक को खाली किया है और उसकी मरम्म्त की जा रही है। इस दौरान प्लांट में आ रहे 0.75 एमएलडी सीवरेज का उपचार एक ही टैंक से किया जा रहा है। अपग्रेड होने के बाद राहत मिल जाएगी।
लोग बोले, पशु नहीं खा रहे
घास, खेत बीजना छोड़ दिए
स्थानीय निवासी सीमा ने कहा कि पहले हम प्लांट के पास से घास लेकर आते थे। प्लांट बनने के बाद से इलाके में इतनी गंदगी हो गई है कि पशु भी इलाके का घास नहीं खाते। सब्जियां लगाते थे लेकिन अब खेत बंजर पड़े हैं। मिलखी राम ने कहा कि 20 साल पहले जब सरकारी अधिकारी इलाके में जमीन लेने जाए थे तब मुझे नहीं बताया था कि इलाके में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है, पता होता तो जमीन ही नहीं देता। अब इलाके में बदबू फैली है। हर्ष ने कहा कि इलाके में इतनी ज्यादा बदबू और मच्छर हैं कि रात को सोना मुश्किल हो जाता है। नाले का पानी गंदा हो चुका है जिससे जानवरों में बीमारियां फैलने का खतरा है। पुष्पेंद्र ने कहा कि कई बार अधिकारियों को इलाके में बढ़ रहे प्रदूषण के बारे में बताया लेकिन कुछ नहीं हुआ। प्लांट से थोड़ी दूर श्मशानघाट है लेकिन प्रदूषण के कारण इलाके में लोगों को जलाने की जगह भी नहीं बची है।