फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुशी मना रहे सैकड़ों आरकेएस कर्मचारियों को झटका

विज्ञापन
विज्ञापन
आईजीएमसी अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के कर्मचारियों को रेगुलर करने के फैसले से सैकड़ों कर्मचारी खुशी से झूम उठे। खुशियां आईजीएमसी तक ही सीमित नहीं रहीं, कर्मचारियों ने एक दूसरे को बधाई दी तथा रिश्तेदारों को फोन पर अपने नियमित होने की सूचनाएं तक दे डालीं। लेकिन कुछ ही देर में उनकी खुशियां काफूर हो गईं।
विज्ञापन


कैबिनेट की बैठक में आरकेएस के कर्मचारी रेगुलर जरूर किए हैं लेकिन वह केवल करीब 42 सफाई कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों ने नियमित होने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने सरकार को इन कर्मचारियों को नियमित करने के आदेश दिए थे। ये सफाई कर्मचारी अनुबंध पर आईजीएमसी में तैनात थे। लेकिन भाजपा सरकार ने इन्हें अनुबंध से रोगी कल्याण समिति में ला दिया।
Trending Videos

कोर्ट जाने के बाद हुए नियमित

इनके साथ दूसरे महकमों में अनुबंध पर भर्ती हुए कर्मचारी नियमित हो गए लेकिन यह रोगी कल्याण समिति में ही रह गए। इन्होंने कई बार प्रशासन और सरकार से अपने साथ हो रही ज्यादती के बारे में बताया लेकिन कहीं से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

वीरवार को कैबिनेट की बैठक में इन्हीं आरकेएस के कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला लिया गया। स्थिति स्पष्ट होने के बाद उन सभी कर्मचारियों के चेहरे मुरझा गए जो खुद को भी नियमित मानकर चल रहे थे। वहीं प्रदेश कर्मचारी संघ के अध्यक्ष एसएस जोगटा ने 42 सफाई कर्मचारियों को नियमित करने पर सरकार का आभार जताया।

आरकेएस के तहत बारह-तेरह सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को भी सरकार से रेगुलर करने की मांग की गई है। इस मामले में एक बार फिर मुख्यमंत्री से मिलकर वस्तुस्थिति से अवगत करवाया जाएगा।
विज्ञापन

2002 से लगाए बैठे हैं नियमित होने की आस

आईजीएमसी के विभिन्न विभागों में ऐसे करीब 60 कर्मचारी तैनात हैं जो बरसों से नियमित होने की बाट जोह रहे हैं। इनमें रोगी कल्याण समिति के तहत साल 2002 में रखा गया था। दर्जनों बार जूते घिसाने के बाद भी आज तक इनकी किसी ने कोई सुध नहीं ली। काम करते हुए तेरह साल हो गए हैं, इन्हें अनुबंध तक में नहीं लाया गया।

नियमित होने को चला है संघर्ष
आईजीएमसी अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्सिज भी नियमित होने के लिए संघर्ष की राह पर है। यहां 107 स्टाफ नर्सिज रोगी कल्याण समिति के तहत हैं और करीब 105 अनुबंध पर नियुक्त हैं। पांच साल में नियमित होने की लगातार मांग उठा रही हैं। अब काले बिल्ले लगाकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। ड्यूटी पर काले बिल्ले लगाकर आ रही हैं।

सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक संकेत इन्हें नहीं मिले हैं। इनकी मांग है कि डाक्टरों की तर्ज पर उनके लिए भी सरकार पालिसी बनाए और पांच साल में रेगुलर करें। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि रोगी कल्याण समिति के तहत रखे कर्मचारियों की मांगों को सरकार के ध्यान में लाया गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें