आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा के निर्देशों पर एआई एवं रोबोटिक्स विभाग के डॉ. अमित शुक्ला और प्रशिक्षुओं की टीम इस परियोजना पर काम कर रही है। शुरुआती प्रोटोटाइप तैयार कर लिया गया है और अब इसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम जारी है। अभी तक अधिकतर व्हीलचेयर को चलाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति की मदद, रिमोट या वॉयस कमांड की जरूरत पड़ती है, लेकिन नई तकनीक में लगाए गए कैमरे और सेंसर व्यक्ति के हाव-भाव और संकेतों को समझेंगे।
इसके बाद व्हीलचेयर खुद ही आगे बढ़ेगी और दिशा बदलेगी। यह तकनीक उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा मददगार होगी, जो पूरी तरह से शारीरिक रूप से अक्षम हैं। ऐसे लोग अक्सर अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते हैं। यह व्हीलचेयर उन्हें कुछ हद तक आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास है। टीम के अनुसार व्हीलचेयर रास्ते में आने वाली बाधाओं को भी पहचान सकेगी। यदि सामने कोई व्यक्ति, दीवार या दूसरी रुकावट होगी तो सेंसर उसे भांपकर रास्ता बदल देंगे। भविष्य में इसका इस्तेमाल घरों, अस्पतालों और एयरपोर्ट जैसे स्थानों पर किया जा सकेगा। एआई एवं रोबोटिक्स विभाग के डॉ. अमित शुक्ला ने बताया कि व्हील चेयर पर आधुनिक फीचर जोड़ने का कार्य जारी है।