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Shimla News: आईजीएमसी में शुरू होगा ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

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कैंसर मरीजों को मिलेगी राहत, मशीन की खरीद के लिए सरकार ने अस्पताल को दिया बजट
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अभी आईजीएमसी में नहीं हो रहे हैं ट्रांसप्लांट

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में जल्द ही ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होगी। इसके लिए टर्शरी कैंसर सेंटर में एफेरेसिस मशीन स्थापित की जाएगी। इससे प्रदेश में कैंसर उपचार की सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने मशीन की खरीद के लिए अस्पताल को करीब आठ लाख का बजट उपलब्ध करवा दिया है। इसे स्थापित करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। एफेरेसिस मशीन की खरीद, स्थापना और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने में छह महीने लगने की संभावना है। इसके बाद मरीजों को अस्पताल में ऑटोलॉगस स्टेम सेल (वह स्टेम सेल या रक्त बनाने वाली कोशिकाएं जो खुद मरीज के अपने शरीर से प्राप्त की जाती हैं) ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल सकेगी। अभी आईजीएमसी में मरीजों को ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कैंसर मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बोन मैरो या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों को उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ और अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। साथ ही, उपचार के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ सकता है। कई मामलों में ट्रांसप्लांट के लिए डोनर उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को समय पर उपचार मिलना चुनौती बन जाता है। दूसरे संस्थानों में प्रतीक्षा अवधि अधिक होने से उपचार की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है। आईजीएमसी में यह सुविधा शुरू होने से प्रदेश के मरीजों को दूसरे राज्यों के अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। शुरुआती चरण में ऑटोलॉगस ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध करवाने की योजना है।
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एफेरेसिस मशीन के बिना संभव नहीं प्रक्रिया
बोन मैरो या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में एफेरेसिस मशीन की अहम भूमिका होती है। ऑटोलॉगस ट्रांसप्लांट में मरीज के अपने रक्त से स्टेम सेल एकत्रित किए जाते हैं। मशीन रक्त से जरूरी कोशिकाओं को अलग करती है, जबकि शेष रक्त मरीज के शरीर में वापस पहुंचा दिया जाता है। एकत्रित स्टेम सेल को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा जाता है और ट्रांसप्लांट के दौरान इस्तेमाल किया जाता है।
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कोट
एफेरेसिस मशीन को स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए टेंडर और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सरकार ने मशीन की खरीद के लिए बजट उपलब्ध करवाया है। मशीन स्थापित होने से मरीजों को फायदा मिलेगा।
-डॉ. मनीष गुप्ता, विभागाध्यक्ष, टर्शरी कैंसर सेंटर
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