पीढ़ी दर पीढ़ी भी चलती है बीमारी
पहले ज्यादातर सर्दी के मौसम में धुंध होने के दौरान ऐसे मामले अस्पतालों में बढ़ते थे, लेकिन अब सर्दी, सूखे, पोलन और एलर्जी के दौरान भी अस्थमा के पीड़ित मरीजों में इजाफा हो रहा है। धूल-मिट्टी भी अस्थमा का कारण बन रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार पीढ़ी दर पीढ़ी भी बीमारी चलती है। पूर्व रजिस्ट्रार आईजीएमसी और विशेषज्ञ डीडीयू अस्पताल डॉ. अंकुर धर्माणी ने कहा कि बच्चों में अस्थमा के लक्षण वयस्कों से काफी अलग हैं। बच्चों में अस्थमा का प्रभावी इलाज दवाइयों, आहार और वातावरणीय नियंत्रण के संयोजन से संभव है।
बच्चों में अस्थमा के लक्षण
-शारीरिक गतिविधियों में कमी
-सांस में लगातार कठिनाई
-सुबह व रात में खांसी का बढ़ना
-श्वसन तंत्र में सूजन
-श्वसन नलिकाओं के संकुचन के कारण घरघराहट की आवाज आना
-सीने में जकड़न या बंद होना
-आवश्यकता से अधिक श्वास
इन खाद्य पदार्थों से करना चाहिए परहेज
विशेषज्ञ के अनुसार दूध, अंडे, मूंगफली, गेहूं और सोया जैसे कुछ खाद्य पदार्थ अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। यदि बच्चे को इन खाद्य पदार्थों से एलर्जी है तो इनका सेवन नहीं करने देना चाहिए। अधिक नमक और शक्कर अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।