मामले में राजकीय रेलवे पुलिस थाना शिमला में तैनात कांस्टेबल जो कि चालक के पद पर तैनात है, उसने पुलिस महानिदेशक को शिकायत देकर संबंधित एएसआई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत में कांस्टेबल ने आरोप लगाया था कि उसे निजी कार्य करवाने के लिए दबाव बनाया गया और मानसिक तौर पर परेशान किया गया। कांस्टेबल चालक ने शिकायत में बताया कि उसकी पत्नी गर्भावस्था के नौवें महीने में है और उपचार शिमला स्थित कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) में चल रहा है। ऐसे समय में पत्नी की देखभाल के लिए उसका घर पर रहना जरूरी था।
आरोप है कि उसने अपनी पारिवारिक परिस्थितियों से एएसआई को अवगत करवाया था, बावजूद उसका अस्थायी तबादला जीआरपीएस कांगड़ा कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे सहकर्मियों के बीच बदनाम करने का प्रयास किया गया और उसे डीजीपी का मुखबिर तक कहा गया। इसके अलावा आरोप है कि एक निलंबित अधिकारी की निजी गाड़ी धुलवाने के लिए भी उस पर दबाव बनाया गया। मना करने पर उसके साथ प्रताड़ना का व्यवहार किया गया।
पुलिस मुख्यालय के आदेशों के अनुसार संबंधित एएसआई का तबादला 24 जून 2026 को चौथी भारतीय रिजर्व बटालियन जंगलबेरी, हमीरपुर के लिए किया गया था। हालांकि, आरोप है कि उन्होंने निर्धारित अवधि में नई तैनाती स्थल पर ज्वाइनिंग नहीं दी और विभागीय आदेशों की अवहेलना की। पुलिस मुख्यालय ने इसे हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम-2007 और सरकार द्वारा जारी सेवा संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन माना है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम-2007 की धारा 89 के तहत एएसआई को निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश में चौथी आईआरबी जंगलबेरी के कमांडेंट को मामले में नियमित विभागीय जांच शुरू करने और नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।