फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: चेक बाउंस के मामले में सेब कारोबारी को 6 माह की कैद

विज्ञापन
विज्ञापन
डेढ़ लाख रुपये मुआवजे भी देना होगा
विज्ञापन

सत्र न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई छह माह के साधारण कारावास और 1,50,000 रुपये के मुआवजे की सजा को बरकरार रखा है।

मामले के अनुसार ननखड़ी निवासी बागवान चैन राम ने अगस्त 2014 में मैसर्स स्काई लाइन फ्रूट मार्केटिंग एंड फ्रूट ग्रोअर को 102 पेटी रॉयल सेब बेचे थे। इसके भुगतान के लिए फर्म के पार्टनर संजय राजटा ने 1,01,144 रुपये का चेक जारी किया था। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक बैंक में लगाया तो बैंक ने जॉइंट साइन आवश्यक की टिप्पणी के साथ इसे लौटा दिया था। तय समय में भुगतान न होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिमला की अदालत ने सितंबर 2025 में संजय राजटा को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह महीने की कैद और 1.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ संजय राजटा ने सत्र अदालत में अपील दायर कर दलील दी थी कि चेक पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे बल्कि फर्म के दूसरे पार्टनर अजय कुमार के हस्ताक्षर थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


सत्र अदालत ने अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टनरशिप फर्म अपने सभी साझेदारों का प्रतिनिधित्व करती है। बागवान को फर्म के आंतरिक बैंक नियमों या संयुक्त हस्ताक्षर की व्यवस्था की जानकारी होना जरूरी नहीं है। फर्म के खाते से जारी चेक और सेब की खरीद का रिकॉर्ड साबित होने के बाद आरोपी केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि चेक पर किसी अन्य पार्टनर के हस्ताक्षर थे। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को कानूनी रूप से सही ठहराते हुए सजा यथावत रखी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें