हिमाचल के सेब बागवानों को आढ़ती गोल रेट (औसत दाम) देने से हिचकिचा रहे हैं। देश के अन्य राज्यों की बड़ी मंडियों में भी बागवानों को सेब की पेटियों का औसत रेट दिया जाता रहा है। इस बार छोटे आकर के बढ़िया सेब के दाम तीस फीसदी कम देने पर आढ़ती अड़े हैं। बी श्रेणी का 70 फीसदी सेब तैयार होता है। हिमाचल किसान संघर्ष समिति के सचिव संजय चौहान ने कहा कि सरकार की नाकामी के कारण आढ़तियों और लदानियों की मिलीभगत से बागवानों का पिछले कई साल से शोषण हो रहा है। बागवानों को आज दिन तक न्याय नहीं मिला है।
बागवान प्रदीप ठाकुर और अनंत राम चौहान ने कहा कि मंडियों में अभी ए और बी श्रेणी के सेब के ट्रक मंडियों में ले जाते थे तो आढ़ती सेब की सभी पेटियों का औसत दाम दे देते थे। अब देश के अन्य राज्यों में सेब का औसत दाम देने में आनाकानी करने लगे हैं। बी ग्रेड का सेब छोटा और अच्छा होता है और एक पेटी में छह परतें लगती हैं। इस सेब के दाम आढ़ती तीस फीसदी कम दाम देने लगे हैं। यह प्रथा ढली मंडी में भी शुरू की जा रही है। बागवान इसका कड़ा विरोध करेंगे। ए श्रेणी का सेब पेटी में 22 किलो तक आता है, जबकि बी श्रेणी की छोटा सेब 32 से 34 किलो तक आता है।
आढ़तियों पर नकेल नहीं कसी तो आंदोलन: चौहान
संजय चौहान ने कहा कि आढ़तियों और लदानियों की मिलीभगत से बागवानों का आर्थिक शोषण होता रहा है और सरकार मूकदर्शक बनी रहती है। बागवानों का शोषण नहीं रोका गया तो समिति आंदोलन करेगी। उनका कहना है कि कुल्लू में बागवान ए और बी श्रेणी का सेब क्रेट में भरकर प्रति किलो के हिसाब से गोल रेट में बेच रहे हैं। कुल्लू के बागवानों को सेब के अपेक्षाकृत अच्छे दाम मिलते हैं। शिमला में आढ़ती पैकिंग में सेब खरीदते हैं। सेब क्रेट में कुल्लू में व्यापारी खरीद सकते हैं तो शिमला और दिल्ली की मंडियों में क्यों नहीं?