लोकसभा सांसद और आईटी कमेटी के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बयान देने से पहले तथ्य जान लें। केंद्रीय विश्वविद्यालय के त्रिपुरा या मणिपुर जाने के संबंध में उन्होंने कभी कोई बात नहीं कही।
वीरभद्र सिंह झूठ बोलने के आदी हैं। भाजपा में सभी लोग एक बराबर होते हैं और सब की सुनी जाती है। यहां तक विपक्ष की भी सुनी जाती है, जिसका उदाहरण केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से प्रदेश सरकार के आग्रह पर वापस साइट सिलेक्शन कमेटी का भेजना है।
आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं है। केंद्र की कांग्रेस सरकार को जनता ने जवाब दे दिया और अब हिमाचल प्रदेश की बारी है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना में वे नहीं बल्कि खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बाधाएं डाल रहे हैं। मुख्यमंत्री बताएं कि क्या तत्कालीन यूपीए सरकार भी मेरे नियंत्रण में थी? क्या देहरा को वन जमीन, भूकंप प्रवण क्षेत्र आदि मापदंडों पर तोलकर सुनिश्चित नहीं किया था?
लेकिन प्रदेश में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद वीरभद्र सिंह ने अपनी ओछी मानसिकता को दर्शाते हुए अपनी मर्जी से साइट सिलेक्शन कमेटी की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार को नया प्रस्ताव भेजा।
कमेटी ने फिर धर्मशाला की साइट को यह कहकर नकार दिया कि यह जमीन भूकंप प्रवण क्षेत्र में पड़ती है, लेकिन वीरभद्र सिंह ने अपनी अड़ियल भूमिका का परिचय देते हुए कैबिनेट मीटिंग में केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में बनाने का फैसला लिया।