अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (ड्ब्ल्यूएचओ) वयस्कों और बच्चों के लिए कुल ऊर्जा सेवन में मुक्त शर्करा को 10 प्रतिशत से कम रखने की सिफारिश करता है, आदर्श रूप से 5 प्रतिशत से कम, और शिशु आहार में किसी भी अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल ना करने की सलाह देता है। हालांकि, अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में कुछ पैकेज्ड शिशु आहार में प्रति सर्विंग लगभग 2.7 ग्राम अतिरिक्त चीनी होती है, जबकि कई लोकप्रिय सॉफ्ट ड्रिंक्स में प्रति 100 मिलीलीटर लगभग 10.6 ग्राम चीनी होती है।
ऐसी उच्च चीनी की खपत बचपन के मोटापे, कम उम्र में डायबिटीज, दांतों की समस्याओं और युवाओं में अन्य रोगों में बढ़ोतरी करती है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि यह आह्वान हानिकारक वसा को कम करने की दिशा में सराहनीय प्रयास है, जो अत्यधिक चीनी के साथ मिलकर मोटापे और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान देते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जी के मन की बात और अन्य सार्वजनिक संबोधनों में दिए गए जोर का भी उल्लेख किया।