हिमाचली छोकरे के तौर पर विपक्ष के निशाने पर रहे अनुराग ठाकुर ने एक दिग्गज नेता के पुत्र जैसे कटाक्ष से शुरू किए अपने सियासी सफर को काबिलियत और परफॉर्मेंस के बूते मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री तक पहुंचाया। कांग्रेस को संसद से लेकर सड़क तक परिवारवाद पर भाजपा घेरती है तो अनुराग का उदाहरण देकर विपक्ष सवाल उठाता था। साथ ही पार्टी की युवा पीढ़ी की भीड़ में भी खुद को साबित करना उनके लिए बड़ी चुनौती था। लेकिन अनुराग ठाकुर ने सरकार और संगठन से मिली हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। हरियाणा में भाजपा की सरकार बनवाने में उनकी अहम भूमिका निभाई। वहीं, जम्मू कश्मीर के स्थानीय चुनावों में उनके नेतृत्व में ही पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया।
इसके अलावा दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल समेत जिस भी चुनावी जिम्मेदारी के लिए अनुराग को लगाया गया, उन्होंने पार्टी उम्मीद से ज्यादा बेहतर करने का प्रयास किया। संसद में भी वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने राफेल डील से लेकर पीएम केयर्स पर किए गए हमलों पर सरकार की ढाल बन राहुल गांधी को जवाब देते रहे। अपने काम की बदौलत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बने जेपी नड्डा और अमित शाह से संबंध मजबूत किए। कोरोना काल में जब विदेशों से आने वाली मदद को कस्टम से बिना झंझट जल्द निकलवाने, बैंकों का मर्जर कर देश की आर्थिक मजबूती में भी योगदान दिया। इन्हीं सब चीजों का नतीजा यह हुआ कि जब मोदी मंत्रिमंडल से दिग्गज मंत्रियों की छुट्टी हो रही थी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रमोशन देकर उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया।
सियासी गलियारों से लेकर खेल के मैदान तक रहते हैं सक्रिय
अनुराग के लिए कहा जाता है कि वह दिल्ली के सियासी गलियारों से लेकर खेल के मैदान तक खासे सक्रिय रहते हैं। सियासी नफा नुकसान भांपने की उनकी कला ही थी जिसकी बदौलत बीसीसीआई से हटने के बावजूद वह अमित शाह के बेटे जय शाह को बीसीसीआई में महासचिव बनवाने में सफल रहे। इसका लाभ भी उन्हें अमित शाह के करीब पहुंचने में मिला। बतौर सांसद भी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में खासे सक्रिय रहते थे। दुष्यंत चौटाला जैसे युवा सांसदों के बीच सक्रियता के चलते ही वह हरियाणा में भाजपा की सरकार बनवाने में सफल रहे और इससे पार्टी और सरकार में उनका कद और बढ़ा।