इसी बीच, ब्रैकल कॉरपोरेशन ने इस परियोजना का 280 करोड़ रुपये का अपफ्रंट प्रीमियम हिमाचल सरकार को देना था, जो समय पर नहीं दिया।बाद में इसे अदानी कंपनी ने जमा किया। इसकी जानकारी ब्रैकल कॉरपोरेशन ने सरकार को दी।
ब्रैकल और अदानी कंपनियों में साझेदारी का एक करार हुआ था, मगर इसे सरकार ने मंजूरी नहीं दी। बाद में ब्रैकल ने इस पैसे को वापस अदानी को लौटाने की सरकार से दरख्वास्त की।
इसी बीच रिलायंस कंपनी ने भी पेशकश की है कि यह प्रोजेक्ट अगर उसे दिया जाए तो अपफ्रंट प्रीमियम वह जमा कर देगा, मगर बाद में वह भी पीछे हट गया। दो दिन पहले हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में जंगी थोपन-पोवारी प्रोजेक्ट एसजेवीएनएल को दे दिया।
दूसरी ओर विजिलेंस ने सरकार को एक पत्र भेजकर ब्रैकल कंपनी की ओर से पेश दस्तावेजों में फर्जीवाडे़ का संदेह जताते हुए इस मामले पर भी जांच बैठाने का अनुरोध किया है।
मुख्य सचिव बीके अग्रवाल से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने गृह विभाग को ही इसकी जानकारी होने की बात की। वहीं गृह विभाग के अधिकारी इस बारे में कुछ कहने से बच रहे हैं।