बीबीएन में गत्ता उद्योगों में उत्पादन फिर संकट में है। उत्तर प्रदेश की पेपर मिलों ने कीमत सही न मिलने पर बुधवार से फिर से हड़ताल शुरू कर दी है।
इसका सीधा असर बीबीएन के गत्ता उद्योग पर पड़ सकता है। पिछले दो माह के दौरान पेपर मिलों ने 4 से पांच रुपये तक पेपर के रेट बढ़ा दिए है।
लेकिन गत्ता संचालकों के लिए कोई भी कंपनी बढ़े हुए रेट देने के तैयार नहीं है। जिससे गत्ता संचालकों को अपने उद्योग बंद करने के सिवाए दूसरा कोई चारा नजर नहीं आ रहा है।
यहां करीब ढाई सौ गत्ता उद्योग अपने कच्चे माल के लिए यूपी की पेपर मिलों पर निर्भर रहते है। 50 हजार टन पेपर की खपत है। 70 फीसदी खपत यूपी की पेपर मिले पूरा करती है।
लेकिन यूपी की पेपर मिलों की लगातार मनमानी के चलते अब गत्ता उद्योग चलाना घाटे का सौदा बन गया है।
सभी कंपनियां एक साथ बढ़ा सकती है कीमतें
गत्ता उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि इस बारे में वह प्रदेश के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री से मिल चुके है लेकिन उनकी समस्या पर कोई भी सुनवाई नहीं हुई है।
पेपर मिल लगातार अपनी तानाशाही कर रहे है। प्रदेश की कंपनियां गत्ता के डिब्बे के रेट बढ़ाने को तैयार नहीं है। उन्होंने प्रदेश के सभी गत्ता संचालकों से अपील की है कि वह एकजुट हो कर सभी कंपनियों को गत्ते के डिब्बों से रेट बढ़ाने के आग्रह करें।
अन्यथा उन्हें अपने उद्योग चलाना कठिन हो जाएगा। वहीं गत्ता उद्योग संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र अरोड़ा ने माना कि उत्तर भारत में गत्ता संचालक पेपर मिलों की मनमानी का शिकार हो रहे है।
उन्होंने सभी कंपनियों से निवेदन किया है कि वह अपनी गत्ते के डिब्बों पर 15 से 20 फीसदी रेट बढाएं अन्यथा गत्ता उद्योग प्रदेश से बंद हो जाएंगे।