प्रदेश में मायके की संपत्ति पर हिस्सा होने के बावजूद यहां की अधिकांश महिलाएं इस पर कब्जा नहीं लेती हैं, जबकि कानूनन उनका अधिकार होता है। ऐसे तमाम पहलुओं पर ही सरकार ने गौर किया है। उन्होंने प्रदेश के समस्त मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बंदोबस्त अधिकारियों, एसडीएम, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को इस संबंध में दिशा-निर्देशों की अनुपालना करने को कहा है।
अभी भूमिहीन को मिलती थी जमीन
प्रदेश सरकार अभी भूमिहीन लोगों को घर बनाने के लिए जमीनें देती रही है। इन्हीं में अगर विधवाएं भी आती हाें तो उन्हें भी यह लाभ मिलता था, मगर उनके आय प्रमाणपत्र में पैतृक संपत्ति बाधा बनती थी। सरकार के नए फैसले से हिमाचल की हजारों महिलाएं लाभान्वित होंगी। इसमें देखना यह होगा कि ऐसी विधवा को अपने पति के घर में ही रहना होगा। बेशक मायके में उसके नाम से प्रापर्टी हो।