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अमर उजाला फाउंडेशनः मेधावियों ने उत्साह से दी अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा

Mon, 30 Oct 2017 02:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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अमर उजाला फाउंडेशन की स्कूल शिक्षा बोर्ड के मेधावियों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा का रविवार को आयोजन किया गया। राजधानी शिमला में डीएवी लक्कड़ बाजार स्कूल में यह परीक्षा आयोजित की गई। 
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परीक्षा को लेकर छात्रों में खासा उत्साह नजर आया। परीक्षा में जिला शिमला सहित सोलन, सिरमौर, किन्नौर से आए 56 मेधावियों ने भाग लिया। इनमें नवीं और दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले 17 और ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के 39 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। 

तय शेडयूल के मुताबिक डीएवी लक्कड़ बाजार स्कूल में हुई इस परीक्षा में हिस्सा लेने आए छात्रों और उनके अभिभावकों ने अमर उजाला फाउंडेशन की इस पहल की सराहना की।
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अभिभावकों ने जहां इसे प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के होनहार और जरूरतमंद, गरीब प्रतिभावान छात्रों को आगे बढ़ने में मदद करने वाली पहल करार दिया, वहीं परीक्षार्थी छात्रों ने कहा कि इस परीक्षा में बैठना ही उनके लिए एक नया अनुभव है। 

इससे उनका आत्मविश्वास जगा है। छात्रों ने कहा कि छात्रवृत्ति की इस परीक्षा से उन्हें अपने ज्ञान का आकलन करने का मौका मिला। परीक्षा ने हमें प्रतिस्पर्धा के इस युग में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। छात्रों ने कहा कि प्रश्नपत्र प्रतियोगी परीक्षाओं के पेट्रन पर आधारित था। 

गणित, सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल, हिंदी इंग्लिश के साथ हर विषय को इसमें तवज्जो दी गई थी। इससे उन्हें और मेहनत करने के लिए प्रेरणा भी मिली है, कि भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के लिए वे और अधिक मेहनत करें। 

डीएवी स्कूल की प्रधानाचार्य कामना बेरी ने भी अमर उजाला के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने सही मायने में समाज के हर वर्ग के होनहारों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली पहल करार दिया।

प्लेटफार्म बहुत अच्छा

पापा और दादा जी ने अमर उजाला की छात्रवृत्ति परीक्षा की खबर को पढ़ा था। इसके बाद पिता ने पेपर देने की बात कही। मैं भी पिता के कहने पर पेपर देने आया हूं। छात्रवृत्ति परीक्षा का पेपर देकर अच्छा लग रहा है। यह प्लेटफार्म बहुत अच्छा है। -रिजुल, बिलासपुर नवीं कक्षा

अंकल के साथ आई पेपर देने
मैं अपने अंकल के साथ इस परीक्षा को देने के लिए शिमला आई हूं। यह परीक्षा प्रतियोगी परीक्षा की ही तरह है। पहली बार इस तरह की परीक्षा देने से काफी गौरवान्वित महसूस हो रहा है। -सिमरन, सरकाघाट, भराड़ी स्कूल

यह पेपर भी करूंगी क्लीयर

अमर उजाला की छात्रवृत्ति का पेपर भी क्लीयर करूंगी। हर कक्षा में फर्स्ट आती हूं। इस तरह की प्रतियोगी परीक्षा के लिए पहले से ही तैयार रहती हूं। मेरे बड़े भाई और स्कूल के शिक्षक प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी करवाते हैं।-प्राची, कसौली

मानव कल्याण ही लक्ष्य
मानव कल्याण के लिए कार्य करना चाहता हूं। साइंटिस्ट बनकर ही यह कार्य पूरा हो सकता है। विभिन्न शोध व आविष्कार के माध्यम से देश का विकास करना ही मेरा लक्ष्य है। इसलिए तकनीकी व ज्ञान विज्ञान से जुड़ी किताबें रुचि से पढ़ता हूं।- अमित, राजगढ़

डॉक्टर बनना है सपनाः स्मृति


मेरा सपना डॉक्टर बनना है। गरीब और असहाय मरीजों की मुफ्त में मदद कर सेवा करना ही मेरा लक्ष्य है। मैंने पापा से ही दूसरों की मदद करना सीखा है। उच्च शिक्षा ग्रहण करके और इस तरह की छात्रवृत्तियां पाकर मैं किताबों को लेकर पड़ने वाले बोझ को भी कम करना चाहती हूं।-स्मृति, चौपाल

इस बार जरूर हासिल करूंगा छात्रवृत्ति : रोहित
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सरकाघाट के छात्र रोहित गुप्ता ने बताया कि 2016 में भी अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा दी थी। इस बार काफी मेहनत की है। उम्मीद है जरूर छात्रवृत्ति हासिल करूंगा। रोहित के साथ चचेरे भाई मनन ने भी परीक्षा दी। मंडी के जीएसएस सलवान की प्रियंका, मधू, अंजली, मनन, जबकि बिलासपुर से सुशीला, हमीरपुर के विशाल धीमान ने भी छात्रवृत्ति पेपर दिया।
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अभिभावकों ने क्या कहा

बच्चों में बढ़ता है आत्मविश्वास : रूपलाल
राजगढ़ के रूपलाल ने अमर उजाला की मुहिम अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा की सराहना की और कहा कि परीक्षा में भाग लेने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है। वह अपनी बेटी महक के साथ आए हैं। उनकी बेटी राजगढ़ में नवीं कक्षा में पढ़ती है। 

हर साल होनी चाहिए ऐसी परीक्षा : कुलदीप
बिलासपुर के घुमारवीं से अपनी बेटी के साथ आए कुलदीप ने कहा कि उनकी बेटी को इस छात्रवृत्ति परीक्षा में भाग लेना अच्छा लग रहा है। उन्होेंने कहा कि इस तरह की परीक्षाएं हर साल होनी चाहिए। इनकी बेटी घुमारवीं स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ती है। 

सपना था कि बच्चे दे यह परीक्षा : रीना
घणाहट्टी की रीना ने कहा कि जब मेरी बेटी छठी कक्षा में पढ़ती थी, तब से ही मेरी इच्छा थी कि वह यह परीक्षा दे। आज यह सपना पूरा हो गया है। कहा कि छात्रवृत्ति मिलने से बच्चों में ज्ञान का विकास का होता है। आने वाली प्रतियोगिता परीक्षा के लिए बच्चे मानसिक रूप से तैयार रहते हैं।

किताबों का खर्चा आ रहा अधिक : किशन
किशन सिंह ने कहा कि किताबों का खर्चा अधिक है। इतना वहन नहीं कर सकता हूं। छात्रवृत्ति के बारे में पढ़कर बेटी ने यह परीक्षा दी है। इससे कि मुझ पर से आर्थिक बोझ कम हो सके। जमींदारी करके खर्चा वहन कर रहा हूं। बेटी की उच्च शिक्षा दिलवाना मेरी जिम्मेदारी है।
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