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अमर उजाला बेस संवाद: शिमला की जरूरतें अन्य शहरों से अलग, पहले इन पर हो काम

Fri, 03 Jan 2020 12:07 PM IST
शिमला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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शहर हकीकत में तभी स्मार्ट सिटी बनेगा जब शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी। शहर के युवाओं का मानना है कि अन्य शहरों की तुलना में शिमला की जरूरतें अलग तरह की हैं। यहां बंदरों, लावारिस कुत्तों की समस्या सबसे बड़ी है जिसे स्मार्ट सिटी में शामिल ही नहीं किया गया है। ट्रैफिक जाम एक और बड़ी समस्या है। यहां इलाज बाद में पहले मरीज को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती है।

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अस्पताल पहुंचने पर चालान कट जाता है, क्योंकि पार्किंग नहीं है। महिलाओं के लिए रात को कोई बस या टैक्सी सेवा नहीं है। शहर से बड़े दफ्तर बाहर किए जा सकते हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान किए बिना शिमला स्मार्ट सिटी नहीं बन सकती। करोड़ों रुपये बहाकर कंकरीट की इमारतें खड़ी करने से शिमला स्मार्ट नहीं बन जाएगा। आम लोगों को सबसे पहले इनसे निजात मिलनी चाहिए।

शिमला स्थित अमर उजाला कार्यालय में वीरवार को बिजनेस एकेडमिक सोशल इंटरप्रेन्योर (बेस) कार्यक्रम के तहत स्मार्ट सिटी का सपना: युवा उम्मीदें और अखबार की भूमिका विषय पर संवाद का आयोजन किया गया। इसमें हर वर्ग से जुड़े युवाओं ने बेबाकी से अपनी राय रखी। उदाहरण दिया कि 27 दिसंबर को गृहमंत्री के शिमला दौरे पर अचानक शहर से गाय, कुत्ते और बंदर गायब हो गए।
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चंद घंटे के लिए इन्हें पकड़कर कहां ले जाया गया, किसी को पता नहीं चला। यदि काम इतनी गंभीरता से हो तो शिमला हकीकत में स्मार्ट सिटी बन सकता है। अभी इस प्रोजेक्ट से यह काम गायब हैं। प्रशासन इसके बारे में भी सोचें। हर नया काम तय समयसीमा में पूरा हो, इसकी जवाब देही तय होनी चाहिए। पेयजल बिल, नक्शे जैसी ऑनलाइन सुविधाएं न मिले जो लांच तो हो चुकी है लेकिन अभी तक बंद पड़ी हैं। युवाओं ने कहा कि अखबार जनता और प्रशासन के बीच सेतु बनकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इसी साल स्मार्ट दिखने लगेगा शिमला: प्रोजेक्ट इंजीनियर

- फोटो : अमर उजाला
शिमला स्मार्ट सिटी की प्रोजेक्ट इंजीनियर दृष्टि शर्मा ने बताया कि प्रोजेक्ट से कुल 52 काम होने हैं। अभी उन 28 कामों को पहले करेंगे जिसमें किसी तरह की रुकावटें नहीं हैं। छह ई-टायलेट लगाने, पार्कों के सौंदर्यीकरण जैसे काम शुरू भी कर दिए हैं। युवाओं के लिए चार नये बुक कैफे खोल रहे हैं। लक्कड़ बाजार, लोअर बाजार, जाखू में एस्केलेटर लग रहे हैं। लोगों को इसका फायदा होगा। कारोबारियों के लिए प्री फेब तकनीक से दुकानें बनेंगी। तहबाजारियों के लिए पक्के स्टॉल बनेंगे। इनका साइट विजिट तक हो चुका है।

इसके अलावा संजौली से आईजीएमसी तक कवर्ड पाथ, विकासनगर, कसुम्पटी में पार्किंग, डीडीयू को एडवांस लाइफ स्पोर्ट सिस्टम से लैस दो एंबुलेंस, आर्टिफिशियल आइस स्केटिंग रिंक, कृष्णानगर में माडर्न स्कूल, सीसीटीवी कंट्रोल सिस्टम जैसी योजनाएं हैं जिन पर काम चल रहा है। सभी के टेंडर मार्च से पहले पूरे होंगे। कई के टेंडर कर भी दिए हैं। प्रोजेक्ट इंजीनियर ने संवाद में युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। कहा कि आपदा के लिए भी सेफ शेल्टर बन रहे हैं।

मालरोड से ट्रायल, जल्द स्मार्ट बनेगा शिमला
बर्फबारी में बिजली की लाइनें न टूटें, इसके लिए अंडर ग्राउंड तारें बिछेंगी। स्मार्ट सिटी में अंडरग्राउंड डक्ट बन रहा है। मालरोड पर ट्रायल हो रहा है। बिजली बोर्ड इसमें सहयोग कर रहा है। हमारे कर्मी बर्फबारी के बावजूद दिन रात काम करते हैं। बिल संबंधी शिकायतों के लिए लोग हमें संपर्क कर सकते हैं। जीएस देल्टा, एसडीओ, बिजली बोर्ड

युवाओं ने दिए ये अहम सुझाव
-शहर में पर्यटकों के लिए दर्शनीय स्थल विकसित हों
-फ्लाईओवर, ओवरब्रिज ज्यादा से ज्यादा बनाए जाएं
-स्मार्ट सिटी पर सुझाव देने के लिए सैल बनें
-बंदरों और कुत्तों की समस्या से निजात की भी योजना बने
-पिंक टैक्सियां चलें। सेटबैक पर पार्किंग सुविधा मिले

- फोटो : अमर उजाला
ये हैं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
-2905 करोड़ रुपये का है कुल प्रोजेक्ट
-शहर में होंगे 52 नये काम, पांच साल में होंगे पूरे
-28 काम नगर निगम ने प्राथमिकता पर चुने हैं
-इन 28 कामों के टेंडर मार्च से पहले हो जाएंगे
-बाकी 24 प्रोजेक्ट एनजीटी से स्थिति स्पष्ट होने के बाद बनेंगे

गृहमंत्री के आते ही शहर से गायब हो गए बंदर और कुत्ते
संवाद कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने कई रोचक किस्से भी साझा किए। एचपी यूनिवर्सिटी की रिसर्च स्कॉलर रेखा ठाकुर ने कहा कि 27 दिसंबर को गृहमंत्री अमित शाह की रिज मैदान पर हुई रैली के दौरान अचानक शहर से गाय, कुत्ते और बंदर गायब हो गए। इन्हें कहां ले जाया गया, इसका पता नहीं। लेकिन लोगों को कुछ देर के लिए राहत जरूर मिली। कलाकार लोकेश ठाकुर ने कहा कि शिमला में पहले सड़कें बनाते हैं, फिर इसे खोदते हैं। गेयटी थिएटर में भी बाहरी कलाकारों को जगह मिलती है, लेकिन स्थानीय कलाकार के लिए थियेटर नहीं मिलता।

इसी गेयटी में कलाकारों को खाने पीने की चीजें ले जाने पर पाबंदी है। लेकिन यहीं पर नेताओं के आने पर खाने पीने की चीजें परोसी जाती हैं। अधिवक्ता भारती वर्मा ने कहा कि अस्पतालों में एक दिन पर्ची काटने, दूसरा दिन चेकअप करवाने और तीसरा दिन टेस्ट करवाने में लगता है। शहर में ओला, उबर टैक्सियां नहीं चलती। कारण ये है कि यहां के टैक्सी आपरेटर इन्हें चलने नहीं देते। कारोबारियों ने स्मार्ट सिटी के तहत लोअर बाजार में होने वाले काम पर अंदेशा जताया। कहा कि यह मुश्किल काम है।

बढ़नी चाहिए बुक कैफे, लाइब्रेरी की संख्या : नेगी
छात्रा ख्याति नेगी ने कहा कि शहर में बुक कैफे, लाइब्रेरी की संख्या बढ़नी चाहिए। स्मार्ट सिटी में हर बड़े उपनगर में इसकी सुविधा देनी चाहिए। जो लाइब्रेरी अभी है, उसकी क्षमता भी बढ़ाई जाए। इसमें भी बैठने की सही व्यवस्था हो, किताबें हों तभी फायदा है। सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुधारा जाए।

मंडियों को स्मार्ट बनाने की कोई योजना नहीं : प्रशांत
बागवान प्रशांत सेहटा ने कहा कि स्मार्ट सिटी में कई बड़े प्रोजेक्ट बनाए गए हैं। लेकिन शहर के भीतर जो मंडियां हैं, उनके विस्तारीकरण को लेकर कोई योजना नहीं। हर सीजन में बागवान परेशान होते हैं। पार्किंग न होने से गाड़ियां रास्ते में रोकी जाती हैं। मंडियों के विस्तारीकरण और पार्किंग जैसी सुविधाओं पर भी फोक्स होना चाहिए था।

कामचलाऊ काम न हों, एयर एंबुलेंस भी मिले : गौरव
कारोबारी गौरव गुप्ता ने कहा कि निगम ने पानी बिल की आनलाइन सुविधा तो लांच की लेकिन यह अब तक बंद है। ऐसा काम न हो। स्वास्थ्य के क्षेत्र पर फोक्स होना चाहिए था। शिमला में बर्फ पड़ती है। फिर एंबुलेंस तक नहीं चलती। ऐसे में एयर एंबुलेंस जैसी सुविधाएं होनी चाहिए थी। पार्किंग के भी प्रोजेक्ट बनें।

- फोटो : अमर उजाला
शहर में वैकल्पिक सड़कें भी बनें : ईशांत
इंशात सिंह ने कहा कि शहर में वैकल्पिक सड़कें बननी चाहिए ताकि मुख्य सड़क से जाम कम हों। विक्ट्री टनल से लक्कड़ बाजार के लिए ऐसी संभावना तलाशनी चाहिए। ट्रैफिक वन वे भी किया जा सकता है। स्मार्ट सिटी के बजट की मॉनिटरिंग हों। आपदा के लिए सेफ शेल्टर बनें। दिव्यांगों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाए।

स्मार्ट सिटी के लिए जनता के सुझाव जरूरी : नंदा 
कारोबारी करण नंदा ने कहा कि शिमला में हर तरह के लोग रहते हैं। ऐसे में स्मार्ट सिटी के लिए जनता के सुझाव भी लिए जाने चाहिए। इसके लिए सुझाव सेल बने। हर वार्ड में पार्किंग के लिए योजनाएं बननी जरूरी है। लेकिन नियम भी सख्ती से लागू हों ताकि न्यू शिमला की तरह मनमानी न हों।

नशे और बंदरों से बचाने की भी योजना बने : किरण
स्काउट एंड गाइड की सदस्य किरण ठाकुर ने कहा कि शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात मिलनी चाहिए। अभी प्रोजेक्ट में इसके लिए कोई योजना नहीं बनी है। युवाओं को नशे से बचाने, शहर में तहबाजारियों की समस्या कम करने को लेकर भी काम होना चाहिए। झांसी पार्क बोलने को लेडीज पार्क है, लेकिन यहां नशेड़ी और जोड़े घूमते हैं।

ट्रैफिक सिग्नल बंद, टैक्सियां अनसेफ
अधिवक्ता भारती वर्मा ने कहा कि शहर में ज्यादातर चौक पर ट्रैफिक सिग्नल लाइटें बंद हैं। नवबहार से चलने वाली टैक्सी बदतर हालत में है। ऐसे कैसे शिमला स्मार्ट बनेगा। पहले इनकी हालत बदलो। आईजीएमसी में मरीजों की गाड़ी का चालान कटता है। पहले पार्किंग तो दो, तब चालान काटो। पर्ची बनाने, चेकअप कराने के लिए लाइनें लगती हैं।

हर काम की जवाबदेही होनी चाहिए
डेंटल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अरुण ठाकुर ने कहा कि शहर में स्मार्ट सिटी से करोड़ों के काम हो रहे हैं। इससे जनता को सुविधा ही मिलेगी लेकिन हर काम की जवाबदेही तय होनी चाहिए। नियमों का पालन होना चाहिए। समयसीमा का भी ख्याल रखा जाए ताकि जनता को सुविधाएं मिलें। ट्रैफिक शहर की सबसे बड़ी समस्या है, पहले ये हल हो।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में सुधार जरूरी : दीपक 
डेंटल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर दीपक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुधरना जरूरी है। सिस्टम ठीक होगा तो लोगों को गाड़ी ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सड़क पर गाड़ियां कम होंगी और जाम नहीं लगेगा। देर रात तक बस या टैक्सी सेवा मिले। पार्क, पार्किंग और स्ट्रीट लाइटों की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए, जिसका अभी अभाव है।
 
शहरवासियों को भी बनना होगा स्मार्ट : सूद
बैनमोर वार्ड की पार्षद किमी सूद ने कहा कि स्मार्ट सिटी बनाने के लिए स्मार्ट सोच जरूरी है। कूड़ेदान अंडरग्राउंड कर रहे हैं ताकि बंदरों का आतंक कम हो। अस्पतालों के पास पार्किंग बना रहे हैं ताकि मरीजों को दिक्कत न हों। शहर के लिए कई ऐसे प्रोजेक्ट बनाए हैं, जो जनता को फायदा देंगे। हेरिटेज चीजों को बचाना होगा, फॉरेस्ट कवर बढ़ाना होगा।

खेल, टूरिज्म के लिए भी बनाएं प्रोजेक्ट : स्वप्निल
छात्र स्वप्निल चौहान ने कहा कि शहर में खेल मैदान नहीं हैं, युवा जाएं तो कहां। कलाकारों के लिए सिर्फ एक थियेटर है। पर्यटकों के देखने के लिए भी शिमला में सिर्फ रिज और बर्फ होती है। इस पर भी प्रोजेक्ट बनें। बर्फबारी में सात-सात दिन शहर में बिजली नहीं आती, यातायात ठप रहता है, ऐसे में हम कैसे स्मार्ट बनेंगे। इस पर भी काम हो।

भविष्य को ध्यान में रखकर बनें योजनाएं : लोकेश 
कलाकार लोकेश ठाकुर ने कहा कि अभी पहले सड़क बनती है, फिर तारें-पाइपें बिछाने के लिए उसकी खुदाई होती है। पैसों की ऐसे बर्बादी न हों। डक्ट बने। बर्फ हटाने की नई तकनीक लाएं। कलाकारों के लिए मंच मिले। महिलाओं के लिए रात में पिंक टैक्सी चलाएं। इलेक्ट्रिक बसों में सोलर चार्जिंग जैसी तकनीक इस्तेमाल कर सकते हैं।
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शहरवासियों को क्वालिटी लाइफ भी मिले : कनिका 
एमबीबीएस की छात्रा कनिका सेठी ने कहा कि शहर में ट्रैफिक इतना है कि मरीज को इलाज से पहले अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन रहा है। अस्पताल में पार्किंग तक नहीं मिलती। बीसीएस में रहती हूं, वहां सड़कें तंग हैं। रोज बसें फंसती हैं। स्मार्ट सिटी में मूलभूत सुविधाओं पर पहले फोक्स हो। पीने योग्य पानी, स्वास्थ्य सुविधा, बेहतर यातायात को प्राथमिकता मिले।

धंसते रिज के बारे भी सोचे नगर निगम
एचपीयू के शोधार्थी रेखा ठाकुर ने कहा कि ऐतिहासिक रिज धंस रहा है, निगम इस बारे में भी सोचे। अभी स्मार्ट सिटी में युवाओं के लिए कुछ नहीं। हैंडीक्राफ्ट सेंटर, थिएटर, कामकाजी महिलाओं के लिए हास्टल, पर्सनेलिटी डेवलपमेंट सेंटर बनने चाहिए। अमर उजाला का प्रयास अच्छा है जिसमें हमें पक्ष रखने का मौका तो मिला। 

राजधानी से बाहर हों दफ्तर, मोनो रेल चले : संगीता 
एचपीयू की शोधार्थी संगीता ने कहा कि शहर से सचिवालय, हाईकोर्ट समेत बड़े दफ्तर बाहर होंगे तो शहर में जाम नहीं लगेगा। छात्र भी इससे परेशान हैं। घंटों बसों में बर्बाद हो रहे हैं। स्लम एरिया के लिए भी योजनाएं बनें। रेलवे लाइन आगे बढ़े, मोनो रेल जैसे प्रोजेक्ट भी स्मार्ट सिटी में शामिल किए जाने चाहिए थे।
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