बेटी तपस्या के साथ सुरभि।
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कोरोना ने चार साल की तपस्या से पिता का साया छीन लिया है। पिता सन कुमार सैहब सोसायटी में काम करते थे। वह परिवार में अकेले कमाने वाले थे। परिवार छोटा शिमला में रहता है। अभी सन कुमार को नौकरी लगे दो साल ही हुए थे कि अचानक कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। उन्होंने आईजीएमसी अस्पताल में दम तोड़ा।
सन कुमार की पत्नी सुरभि पर अब परिवार चलाने के साथ बेटी तपस्या की पढ़ाई करवाने का जिम्मा भी है। शिमला जैसे महंगे शहर में गुजारा करना मुश्किल है। सुरभि को भी परिवार की चिंता सता रही है। हालांकि, स्थानीय पार्षद किमी सूद के प्रयासों से सुरभि को सैहब सोसायटी में नौकरी मिल सकती है। इसके लिए नगर निगम में भी बात हो गई है।
बच्चों के साथ शेखर। (फाइल फोटो)
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कोरोना महामारी ने बैजनाथ पपरोला नगर पंचायत के वार्ड नंबर दो के दो बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया है। मां का सात वर्ष पूर्व तलाक हो चुका है। 35 वर्षीय शेखर की मौत के बाद दोनों बच्चों को अब भविष्य की चिंता सताने लगी है। फिलहाल दोनों की देखभाल उनके चाचा-चाची कर रहे हैं। शेखर की 10 मई को मौत हो गई थी।
गत वर्ष प्रशासन की ओर से शुरू किए गए कोविड सेंटर के मरीजों को शुरुआती समय में शेखर ही भोजन उपलब्ध करवाते थे। उनके दोनों बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। शेखर बच्चों के लिए दुकानें व घर के रूप में संपत्ति छोड़ गए हैं। फिलहाल परवरिश दुकान के किराये से हो रही है, लेकिन आने वाले समय में पढ़ाई व अन्य आवश्यकताओं के लिए यह राशि कम पड़ जाएगी।