23 अगस्त 2012 को सरकार ने जेबीटी पदों के लिए टेट को अनिवार्य बना दिया और 12 सितंबर 2012 को 1300 से अधिक पदों को भरने का निर्णय लिया। प्रार्थियों का कहना था कि वे 2002 व 2003 बैच के प्रशिक्षित हैं और वर्ष 2010-11 में उनकी केवल अंतिम परीक्षा ली गई।
अंतिम परीक्षा का आयोजन उनके हाथ में नहीं था, जिस कारण उन्होंने खुद को 2002 व 2003 के बैच में जेबीटी ठहराए जाने की मांग की थी। प्रार्थियों ने उनके लिए जेबीटी भर्तियों में टेट की अनिवार्यता में छूट की मांग भी की थी।
कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए इन भर्तियों के लिए टेट की अनिवार्यता को जायज ठहराया। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार को आदेश
दिए थे कि वह प्रार्थियों की मांग कानून के अंतर्गत कंसीडर करे। सरकार ने इन आदेशों को अपील के माध्यम से खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी, जिसे स्वीकारते हुए कोर्ट ने यह आदेश पारित किए।