शिक्षा के क्षेत्र में निजी कोचिंग और ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर्स चांदी कूट रहे हैं। स्कूलों में मिलने वाली शिक्षा के अलावा घर पर ट्यूशन देने का कारोबार खूब फल फूल रहा है। बच्चों के माता-पिता की उम्मीद स्कूलों से कम और घर पर पढ़ाने वाले मास्टरजी से ज्यादा रहती है।
लोगों में यह अवधारणा है कि स्कूलों में बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता। लिहाजा, शिक्षा के गिरते स्तर और शिक्षकों के रवैये पर सरकार गंभीर हो गई है।
शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूल मुखियाओं को निर्देश दिए हैं कि सुबह स्कूल खुलने से पहले और शाम को छुट्टी होने के बाद नैतिक दायित्व के तहत स्पेशल कोचिंग कक्षाएं लगवाएं। नौवीं से बारहवीं के बच्चे जिस सब्जेक्ट में कमजोर हों, उन्हें स्पेशल कोचिंग दें।
अध्यापक नैतिक दायित्व के तहत स्पेशल कोचिंग कक्षाओं में पढ़ाएंगे। इसकी एवज में बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह स्पेशल कोचिंग कक्षाएं केवल स्कूल में आयोजित की जाएंगी।