अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की शोभा बढ़ाने पहुंचे जिला के 228 देवी देवता अपने देवालय लौट गए हैं। शनिवार को 200 से अधिक देवी-देवता अपने-अपने देवालय पहुंच गए हैं।
दशहरा से वापस अपने देवालय की ओर जाते देवताओं का जगह-जगह लोगों ने धूप और फूल मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया है।
कई जगहों पर लोगों ने देवता के हारियानों, कारकूनों और देवलुओं को चाय पान और हलवे का भी आयोजन किया गया। करीब दो सप्ताह से देवालय से बाहर रहे अपने आराध्य देव को देखकर ग्रामीणों के चेहरे में रौनक लौट आई है।
देवता के अपने देवालय की चौखट पर पहुंचने पर ग्रामीण लोगों ने अपने कुलज का जोरदार स्वागत किया है। कुल्लू, मनाली, नग्गर, मणिकर्ण, सैंज, दियार, लगघाटी, बंजार और आनी-निरमंड घाटी के देवी देवता अपने मंदिर में देव परंपरा अनुसार विराजमान हो गए हैं।
अधिष्ठाता देवता खुडीजल, टकरासी नाग, देवता चंभू जहां देवालय पहुंच गए है तो वहीं कुल्लू के राज वंश की दादी देवी हिडिंबा मनाली स्थित अपने देवालय ढुंगरी पहुंच गई हैं।
जिला देवी देवता कारदार संघ के महासचिव टीसी महंत ने बताया कि देवी देवताओं की कृपा से दशहरा पर्व बेहतरीन तरीके से संपन्न हुआ है। उन्होंने कहा कि बंजार घाटी के सभी देवता अपने-अपने देवालय पहुंच गए हैं।
अपने आराध्य देवी देवता को देख ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। उधर, खुडीजल के कारदार शेर सिंह ने बताया कि आउटर सराज के सभी देवताओं अपने देवालय पहुंच गए हैं।