हिमाचल मूल के कद्दावर भाजपा नेता एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के हस्तक्षेप से हिमाचल में प्रस्तावित एम्स के स्थान चयन पर विवाद खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि एम्स के लिए बिलासपुर का चयन होने में नड्डा का ही प्रभाव रहा है।
राज्य मंत्रिमंडल ने बिलासपुर में एम्स बनाने पर अपनी मुहर लगा दी है। इससे पिछले छह माह से चल रही प्रदेश के नेताओं के बीच खींचतान अब खत्म हो गई है। इससे सबसे अधिक झटका राज्य के स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, परिवहन मंत्री जीएस बाली, सांसद अनुराग ठाकुर और रामस्वरूप शर्मा को लगा है।
जून 2014 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. हर्षवर्धन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एम्स के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कांगड़ा के टांडा मेडिकल कालेज को एम्स बनाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया था।
जबकि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर लगातार मंडी में एम्स खुलवाने की पैरवी कर रहे थे। मंडी के सांसद राम स्वरूप शर्मा भी अपने संसदीय क्षेत्र में एम्स खुलवाने की सिफारिश कर रहे थे। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर अपने संसदीय क्षेत्र के हमीरपुर में एम्स के लिए लगातार वकालत कर रहे थे। इतना ही नहीं, बल्कि प्रदेश के परिवहन मंत्री जीएस बाली कांगड़ा में एम्स स्थापित कराने पर जोर दे रहे थे।
केंद्र में नड्डा के मंत्री बनते ही बिलासपुर में एम्स की मांग उठने लगी। कुछ दिन पहले ही मुख्य संसदीय सचिव राजेश धर्माणी की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम से मिलकर भी बिलासपुर में एम्स स्थापित करवाने की मांग किया। शुक्रवार को कैबिनेट ने बिलासपुर के लिए मुहर लगा दी।