अब एम्स में आने वाले नए लैप्रोस्कोपिक सेट में हाई-स्पीड ड्रिल सिस्टम और इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रोसर्जिकल यूनिट जैसे फीचर्स होंगे। यह तकनीक सर्जन को शरीर के भीतर एचडी क्वालिटी में देखने और माइक्रो-लेवल पर सटीक कटिंग करने की सुविधा प्रदान करेगी। इसमें शामिल वेसल सीलर तकनीक सर्जरी के दौरान नसों को तुरंत सील कर देती है, जिससे खून बहुत कम बहता है और मरीज को अतिरिक्त खून चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती। बड़ा घाव न होने के कारण मरीज को अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल जाती है। जो मरीज पहले 15 दिन में ठीक होते थे, वे अब 4-5 दिनों में घर जा सकेंगे। ऑपरेशन थिएटर में शरीर का कम हिस्सा खुला रहने से बाहरी बैक्टीरिया और संक्रमण का खतरा न्यूनतम हो जाता है। ऑन्कोलॉजी के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए ये उपकरण कैंसर की स्टेज और फैलाव को गहराई से समझने में मदद करते हैं, जिससे इलाज की सफलता दर बढ़ जाती है। बाहरी राज्यों के बड़े निजी अस्पतालों में इस स्तर की सर्जरी का खर्च लाखों में होता है, जो अब एम्स में रियायती दरों पर संभव होगा।
पहाड़ी क्षेत्र के हजारों मरीजों को मिलेगा वरदान
बिलासपुर सहित हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और ऊना जैसे जिलों से आने वाले कैंसर पीड़ितों के लिए यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं होगी। अक्सर जटिल मामलों में मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली के बड़े अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती थी। अब एम्स बिलासपुर में ही सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की यह अत्याधुनिक सुविधा मिलने से समय और पैसा दोनों की बचत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से कैंसर की दूसरी और तीसरी स्टेज वाले मरीजों के सफल ऑपरेशन की दर में भी बड़ा इजाफा होगा।