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Report: एआई और मशीन लर्निंग से लाभदायक, टिकाऊ जैव अर्थव्यवस्था में बदल सकता है पारंपरिक प्रकृति संरक्षण

Fri, 19 Jun 2026 03:35 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।

सार

काउंटिंग ग्रीन वेल्थ रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग पश्चिमी हिमालय में पारंपरिक प्रकृति संरक्षण को एक लाभदायक, टिकाऊ जैव अर्थव्यवस्था में बदल सकता है।
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मुख्य सचिव केके पंत - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश वन विभाग और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी ने एक अग्रणी सहयोग में आधिकारिक तौर पर काउंटिंग ग्रीन वेल्थ: टुवर्ड्स ए फ्यूचर-रेडी पीपल्स फॉरेस्ट इकोनॉमी इन हिमाचल प्रदेश नामक एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग पश्चिमी हिमालय में पारंपरिक प्रकृति संरक्षण को एक लाभदायक, टिकाऊ जैव अर्थव्यवस्था में बदल सकता है। इस रिपोर्ट को हिमाचल सरकार  के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत के साथ कार्यकारी निदेशक भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अश्विनी छात्रे और निदेशक पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन डॉ. पुष्पेंद्र राणा की ओर से लॉन्च किया गया। रिपोर्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कमलेश कुमार पंत ने कहा, 'यह रिपोर्ट हरित हिमाचल, समृद्ध हिमाचल के हमारे दृष्टिकोण में एक युग परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है।

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पहली बार  हमने अत्याधुनिक सैटेलाइट इमेजिंग और एआई मॉडलिंग के साथ फ्रंटलाइन स्थानीय वर्गीकरण विशेषज्ञता को जोड़ा है। यह, यह दिखाने के लिए एक पूर्ण वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है कि कैसे हमारे वन राष्ट्रीय जलवायु स्टेबलाइजर्स के रूप में कार्य करते हैं, जबकि एक लोगों की वन अर्थव्यवस्था का निर्माण करते हैं जो संरक्षण को सीधे हमारे ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी धन और सम्मान में बदल देती है।'  रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य के जंगलों में भारी छिपी हुई क्षमता है, जो इसके वर्तमान संसाधनों के दर्ज मूल्य से दोगुने से भी अधिक है। यह चार प्रमुख उद्योगों की रूपरेखा तैयार करती है। जंगली फलों और स्वास्थ्य उत्पादों के लिए 11,340 करोड़ का बाजार है। चीड़ की खतरनाक, ज्वलनशील सुइयों को इको-कोल में बदलने और 50,000 दिनों का स्थानीय काम पैदा करने वाला 5,500 करोड़ का क्षेत्र है। 5,000 करोड़ का विनियमित खैर लकड़ी उद्योग और निर्माण सामग्री और बायोफ्यूल के लिए 760 करोड़ का बांस बाजार है।

 डॉ. पुष्पेंद्र राणा ने  कहा कि रियल टाइम एआई और सैटेलाइट मैपिंग का उपयोग करके, हम सिर्फ पेड़ों को मापने के बजाय एक गतिशील जलवायु रक्षा प्रणाली का निर्माण कर रहे हैं। यह सटीक ट्रैकिंग हमें विनाशकारी जंगल की आग जैसी पारिस्थितिक आपदाओं से हमारे परिदृश्यों की रक्षा करते हुए वैश्विक जलवायु वित्त पोषण के लिए अर्हता प्राप्त करने की अनुमति देती है। चीड़ की सुइयों जैसे खतरनाक जंगल की आग के खतरे को एक संपन्न, कई करोड़ के सर्कुलर औद्योगिक संसाधन में बदलना एक प्रमुख उदाहरण है कि कैसे आपदा शमन और आर्थिक समृद्धि साथ-साथ चल सकते हैं।  किया। यह रिपोर्ट एक विशाल सह उत्पादन डेटा प्रयास पर बनी है। 500 से अधिक वन रक्षकों और क्षेत्र के कर्मचारियों ने 200,000 जियोरेफरेन्स्ड ट्री लेवल प्रेजेंस रिकॉर्ड और इमेज बनाने के लिए जटिल ऊंचाई वाले क्षेत्रों को पार किया। प्रोफेसर अश्विनी छात्रे, एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक, भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी, आईएसबी ने कहा कि वनों को गतिशील, जीवित सामाजिक पारिस्थितिकी नेटवर्क के रूप में माना जाना चाहिए।

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