नई किस्म का विकास केवीके प्रभारी डॉ. सीमा ठाकुर ने अन्य वैज्ञानिकों के सहयोग से किया है। इससे पहले नौणी विश्वविद्यालय द्वारा विकसित सोलन भरपूर किस्म को भी किसानों ने व्यापक रूप से अपनाया था और उससे अच्छी उपज प्राप्त की थी। वैज्ञानिकों के अनुसार सोलन शक्ति रोपाई के 65 दिनों के भीतर फल देना शुरू कर देती है। नई किस्म की उत्पादन क्षमता 320 से 340 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
इसमें फाइटोप्थोरा लीफ ब्लाइट, फ्रूट रॉट और बैक्टीरियल लीफ स्पॉट जैसी प्रमुख बीमारियों के प्रति मध्यम स्तर की प्रतिरोधक क्षमता है। इससे किसानों को रासायनिक दवाओं का कम उपयोग करना पड़ेगा और उत्पादन लागत भी घटेगी। केवीके प्रभारी डॉ. सीमा ठाकुर ने बताया कि जिला मंडी और सोलन में इसका सफल प्रशिक्षण रहा है। सोलन शक्ति अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण प्रदेश के किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी।