अमर उजाला से विशेष बातचीत में महाधिवक्ता अनूप रतनने कहा कि प्रदेश के नागरिकों को न्याय दिलाने से अधिक कोई और प्राथमिकता नहीं हो सकती। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि जिस पद का दायित्व उन्हें दिया गया है, उसका निर्वहन पूरी जिम्मेदारी से करेंगे।
अधिवक्ता अनूप रतन ने बुधवार को प्रदेश के 17वें महाधिवक्ता का सांविधानिक पद संभाला। सबसे कम उम्र में इस पद को संभालने वाले वे दूसरे महाधिवक्ता बने हैं। इससे पहले संजय करोल को सबसे कम उम्र में महाधिवक्ता बनाया गया था। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश के नागरिकों को न्याय दिलाने से अधिक कोई और प्राथमिकता नहीं हो सकती। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि जिस पद का दायित्व उन्हें दिया गया है, उसका निर्वहन पूरी जिम्मेदारी से करेंगे। महाधिवक्ता कार्यालय एक सार्वजनिक कार्यालय है। कोर्ट के समय को छोड़कर कभी भी उनसे संपर्क साधा जा सकता है। महाधिवक्ता अदालत और सरकार के बीच एक कड़ी का काम करता है। उन्होंने आम जनता को आश्वासन दिया है कि किसी भी स्तर पर वे जनता के काम करने के लिए तैयार हैं। चाहे वो अदालत का मामला हो या फिर सरकार का।
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वे वर्ष 1998 से हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत कर रहे हैं। उन्होंने दस वर्ष तक भारत सरकार की ओर से हाईकोर्ट के समक्ष पैरवी की। पूर्व कांग्रेस सरकार में वे अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने नगर परिषद डलहौजी, माता चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट और मार्केटिंग बोर्ड की ओर से पैरवी की। कहा कि हर व्यक्ति का सांविधानिक अधिकार है कि वह अपने अधिकारों के हनन को रोकने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हैं। ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए उन्होंने आश्वासन दिया है कि महाधिवक्ता कार्यालय पूरी कोशिश रहेगी। सरकार की ओर से हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे के लिए महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से पैरवी करने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। बीएड, जेओए, जेबीटी मामले में उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की पैरवी प्रमुखता से की जाएगी। कांग्रेस सरकार जिन गारंटियों के सहारे जीत कर आई है, उन्हें पूरा किया जाएगा और व्यवस्था परिवर्तन किया जाएगा। व्यवस्था परिवर्तन एक ऐसा नारा है, जिसके तहत हरेक विभाग में व्यवस्था परिवर्तन होगी। निसंदेह महाधिवक्ता कार्यालय भी इसी श्रेणी में आता है।