हिमाचल को प्राकृतिक खेती राज्य बनाने के लिए शून्य लागत कृषि के अध्ययन के लिए समिति गठित होगी। समिति चार साल में प्रदेश को प्राकृतिक खेती राज्य बनाने की संभावनाओं को तलाशेगी।
इस बात की जानकारी राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कृषि विवि पालमपुर के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि उन्हें सिक्किम के बाद हिमाचल को प्राकृतिक कृषि में अग्रणी राज्य बनाने में अहम भूमिका निभाएं। वैज्ञानिकों से इस परियोजना को मिशन के रूप अपनाकर इसे समर्थन देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि रसायनिक और जैविक खेती की प्रथा अपिरहार्य अथवा फिट नहीं है। ‘जहां तक रासायनिक खेती का संबंध है। इसके उत्पाद जहरीले और नुकसानप्रद होने के साथ महंगे भी हैं। जैविक कृषि में उत्पादन की लागत भी अधिक है।
यह मिट्टी से अधिक आवश्यक पोषक तत्व को अवशोषित करती है। इसलिए शून्य लागत प्राकृतिक खेती कृषि के लिए बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि से रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान की समस्या को दूर किया जा सकता है।
उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए अनुकूल कारणों, गुणों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अनुसंशा सहित रिपोर्ट्स के बारे में जानकारी दी। पालमपुर विवि के कुलपति प्रो अशोक सरियाल ने कहा कि विवि में प्राकृतिक खेती के लिए 25 एकड़ भूमि चिन्हित की है।
बैठक में कुलपति के ओएसडी अशोक कुमार शर्मा, कुल सचिव सतीश कुमार, निदेशक प्रसार डॉ. अतुल, निदेशक अनुसंधान डॉ. आरएस जंबाल, अधिष्ठाता, विवि के अलग-अलग विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक भी मौजूद रहे।