शिमला। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो/रेप) के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिमला विवेक शर्मा की अदालत ने पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल चार्जशीट (अंतिम रिपोर्ट) दाखिल होने को परिस्थितियों में बदलाव नहीं माना जा सकता, जिससे जमानत दी जा सके। महिला पुलिस थाना शिमला में दर्ज एफआईआर के अनुसार 25 अप्रैल 2026 को 17 वर्षीय पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि पंजाब निवासी आरोपी अरमान उसे पिछले दो साल से जानता था। आरोपी ने उसे पंजाब के सिरहंद स्थित अपने घर बुलाकर और शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी द्वारा अनदेखा किए जाने पर पीड़िता ने मामला दर्ज करवाया था। आरोपी को 24 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका है और मामले में आरोप तय किए जा चुके हैं। इस मामले में पीड़िता की गवाही 5 सितंबर 2026 के लिए तय की गई है। आरोपी द्वारा इससे पहले तीन जमानत याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इनमें से पहली याचिका 21 मई 2026 को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दी गई थी, जबकि अन्य दो वापस ले ली गई थीं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल होने से आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता कम नहीं होती, बल्कि यह दर्शाता है कि जांच एजेंसी को पर्याप्त सबूत मिले हैं। संवाद