शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी की अदालत ने 15 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में आरोपी वीरेंद्र जसवाल को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता, आरोपी पर कानूनी देनदारी साबित करने में नाकाम रहा। इसके अलावा शिकायत कानूनी समय सीमा पूरी होने से पहले यानी समय से पहले (प्री-मैच्योर) ही दाखिल कर दी थी। संजौली निवासी शिकायतकर्ता राजीव बेक्टा के अनुसार उन्होंने कंडाघाट क्षेत्र में जल निकाय के निर्माण का कार्य किया था। शिकायतकर्ता का दावा था कि आईपीएच विभाग से यह टेंडर ठेकेदार प्रताप सिंह वर्मा को मिला था। उन्होंने यह काम वीरेंद्र जसवाल को सबलेट किया था और वीरेंद्र ने आगे यह काम शिकायतकर्ता को सौंपा था। काम के बदले आरोपी ने उन्हें 15 लाख रुपये का चेक जारी किया, जो बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। संवाद