अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने रद्द किया सजा का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चेक बाउंस के मामले में न्यायालय ने आरोपी परवीन को बरी कर दिया है। अतिरिक्त न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने हिमाचल प्रदेश माइनॉरिटीज फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की ओर से दायर सेक्शन 138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट अधिनियम के मामले में आरोपी की अपील मंजूर कर ली।
ट्रायल कोर्ट ने परवीन को दोषी ठहराया था और 20 नवंबर 2024 को दोष सिद्धि तथा 27 नवंबर 2024 को सजा सुनाई थी। अपील में आरोपी ने केवल एक ही मुद्दा उठाया कि शिकायत समय से पहले दायर की थी। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने डिमांड नोटिस 19 मार्च 2013 को डिस्पैच किया था, कोई एक्नॉलेजमेंट नहीं मिला, सेक्शन 27 जनरल क्लॉजेज एक्ट के अनुसार नोटिस की डीम्ड सर्विस 30 दिन बाद यानी 18 अप्रैल 2013 मानी जाती है। इसके बाद भुगतान के लिए 15 दिन का समय मिलता है, जो 2 मई 2013 को समाप्त होता है लेकिन शिकायत 30 अप्रैल 2013 को दायर की गई जो कॉज ऑफ एक्शन उत्पन्न होने से पहले थी।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा नोटिस 21 मार्च 2013 को प्राप्त होने का दावा केवल बयान पर आधारित है। कोई ट्रैकिंग रिपोर्ट या एक्नॉलेजमेंट उपलब्ध नहीं था। इसलिए शिकायत प्रीमैच्योर थी और कानून की नजर में मेंटेनेबल नहीं थी। अदालत ने एचडीएफसी बनाम रीना का 9 सितंबर 2024 के हाईकोर्ट फैसले का हवाला दिया जिसमें समान स्थिति में प्रीमैच्योर शिकायत रद्द की गई थी।
शिकायतकर्ता द्वारा दिए दूसरे फैसले को इस मामले में लागू नहीं माना गया। अंत में अदालत ने ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि और सजा का आदेश रद्द कर दिया। आरोपी परवीन को सेक्शन 138 एनआई अधिनियम के आरोप से बरी कर दिया गया। जमानत बांड रद्द कर दिए गए। अदालत ने कहा कि यदि कोई फाइन या कंपनशेसन जमा किया हो तो अपील की समय सीमा समाप्त होने के बाद या हाईकोर्ट के आदेशानुसार वापस किया जाए। यह फैसला खुली अदालत में सुनाया गया।