शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एचपीयू के प्रशासनिक भवन के बाहर वर्ष 2014 में हुए प्रदर्शन और नारेबाजी मामले में सीआईटीयू नेता विजेंद्र मेहरा समेत सभी आरोपियों को धारा 188 तहत दर्ज मामले में बरी कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-5 शिमला सुस्मिता शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी विजेंद्र मेहरा, केवल कृष्ण , कमल कुमार, दिनेश कुमार, विजय कुमार, जॉनी, दयाल सिंह, विवेक राणा, संदीप कुमार और बाबू राम सहित अन्य आरोपियों ने एचपीयू में उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर नारेबाजी और प्रदर्शन किया था। पुलिस का दावा था कि इस प्रदर्शन से कक्षाओं, कार्यालयों और पुस्तकालय में बैठे लोगों के कार्य में बाधा पहुंची थी। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 188 के तहत मामला साबित करने के लिए यह दर्शाना अनिवार्य है कि लोक सेवक के आदेश की अवहेलना से किसी व्यक्ति को कोई बाधा, परेशानी या खतरा उत्पन्न हुआ हो। अदालत ने पाया कि मौके पर कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया था और न ही किसी प्रकार की बाधा या असुविधा का कोई ठोस प्रमाण मिला है। संवाद