रात करीब 10:30 बजे भड़की आग, मौके पर लोगों के हंगामे के बाद बुलानी पड़ी पुलिस
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क्रॉसर
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का चल रहा काम
प्लांट के निर्माण कार्य का विरोध कर चुके हैं लोग अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के भरयाल में खड़े किए कचरे के पहाड़ में आग भड़क गई है। रात मंगलवार करीब 10:30 बजे लगी यह आग बुधवार देर शाम तक लगी है। इससे शिमला शहर में धुआं फैल गया है। वहीं आसपास के क्षेत्रों में धुआं फैलने पर लोगों ने यहां कुछ देर के लिए हंगामा किया।
लोगों का कहना है कि धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो रहा है। लोगों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए रात को पुलिस बुलानी पड़ी जिसके बाद मामला शांत हुआ। नगर निगम और दमकल विभाग आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। भरयाल में ही नगर निगम सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगा रहा है। पिछले महीने ही इसका काम शुरू हुआ है। इसका स्थानीय गांव के लोग विरोध कर रहे हैं। मौके पर आकर भी ग्रामीण इस प्लांट का विरोध कर चुके हैं। इनका कहना है कि इस प्लांट के बनने से उनके पेयजल स्रोत दूषित हो जाएंगे। उधर नगर निगम का कहना है कि यह आधुनिक प्लांट होगा जिससे गंदगी नहीं फैलेगी। पिछले 15 दिन से एसटीपी को लेकर विवाद चल रहा है। इसी बीच मंगलवार देर रात अचानक कचरे के पहाड़ में आग लग गई। इसके बाद नगर निगम, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं।
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स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गए। यहां काफी देर तक हंगामा भी हुआ जिसके बाद पुलिस बुलानी पड़ी। देर रात दमकल ने आग बुझा दी लेकिन सुबह होते ही मौके पर फिर आग लग गई। कचरे में अब काफी गहराई पर आग पहुंच चुकी है, ऐसे में इसे बुझाने में काफी समय लग सकता है। नगर निगम के अधिकारी भी बुधवार सुबह से मौके पर डटे हैं और आग लगते ही इसे बुझाया जा रहा है। आग कैसे लगी, इसके कारणों की जांच की जा रही है।
रोज 90 टन कचरा पहुंचता है भरयाल भरयाल में नगर निगम का कूड़ा संयंत्र बना है। शहर से रोजाना निकलने वाले 70 से 90 टन कचरे को भरयाल में ही ठिकाने लगाया जाता है। यहां इस कचरे से बिजली पैदा की जाती है। हालांकि, रोज सारा कचरा ठिकाने नहीं लग पाता। ऐसे में यहां कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ खड़े हो गए हैं। नगर निगम का कहना है कि आग बुझाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
2019 में भी लग चुकी है आग भरयाल कूड़ा संयंत्र के पास कचरे के ढेर में साल 2019 में भी भयंकर आग लग चुकी है। उस दौरान कई हफ्ते बाद आग पर काबू पाया जा सका था। नगर निगम को पॉकलेन मशीन बुलाकर लाखों रुपये खर्च कर आग बुझानी पड़ी थी। कचरे में आग पर काबू पाना मुश्किल होता है। गहराई पर जाने से आग पानी से भी नहीं बुझ पाती। इसीलिए मशीन से पूरे कचरे को पलटकर आग को पानी से बुझाना पड़ता है।