शहर में पेयजल व्यवस्था संभाल रही शिमला जल प्रबंधन निगम कंपनी में कर्मचारियों की तनख्वाह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कंपनी के 180 कर्मचारियों ने अप्रैल की तनख्वाह लेने से इंकार कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी उन्हें चेक के माध्यम से तनख्वाह दे रही है, जो उन्हें मंजूर नहीं। इन्हें ट्रेजरी के माध्यम से तनख्वाह चाहिए।
कंपनी में ज्यादातर कर्मचारी आईपीएच विभाग से लिए हैं। इनमें कुछेक पेयजल व्यवस्था संभाल रहे हैं जबकि कई सीवरेज व्यवस्था। पहले इन्हें ट्रेजरी के माध्यम से तनख्वाह मिलती थी। लेकिन जैसे ही सरकार ने कंपनी का गठन किया, इन कर्मचारियों को कंपनी के बैंक खाते से तनख्वाह जारी होने लगी। इसका कर्मचारियों ने विरोध किया।
कर्मचारी कह रहे हैं कि कंपनी उन्हें चेक से तनख्वाह दे रही है, जो सही नहीं। पिछले महीने कई कर्मचारियों ने लिखित शिकायत देकर मई से तनख्वाह लेने से इंकार कर दिया। इस महीने जब इन कर्मचारियों को तनख्वाह जारी होने लगी तो इन्होंने लेने से मना कर दिया। कर्मचारियों की तनख्वाह संबंधी मामला अब सरकार के पास पहुंच गया है। लेकिन चुनाव में व्यस्त सरकार इस पर कोई फैसला नहीं ले पाई है।
सरकार को भेजा मामला : कंपनी
पेयजल कंपनी ने इन कर्मचारियों की मांग को सरकार के पास भेज दिया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र गिल का कहना है कि कंपनी में शामिल होने के बावजूद कर्मचारियों की तनख्वाह या बाकी वित्तीय लाभ पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कर्मचारियों को यह बताया भी जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कुछ कर्मी ट्रेजरी से तनख्वाह की मांग कर रहे हैं। सरकार से दिशा निर्देश मिलने के बाद ही इस पर कुछ फैसला हो पाएगा।