अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दंत क्षय रोग (दांतों में सड़न) की चपेट में राजधानी के स्कूली बच्चे आ रहे हैं। 6 से 12 साल के बच्चों में यह रोग अधिक पाया जा रहा है। डेंटल डॉक्टरों की मानें तो जंक फूड, चॉकलेट और टॉफियों से बच्चों में दांत के रोग ज्यादा फैल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक देखा जाए तो 100 में से 80 बच्चाें में यह रोग पाया जाता है। जबकि 75 फीसदी सरकारी स्कूल के बच्चों में भी यह रोग है।
उधर, डेंटल के पेरियो विभाग का कहना है कि बच्चों में दांतों की सड़न की समस्या अधिक है। रोजाना दस से बारह बच्चे उपचार के लिए अस्पताल आ रहे हैं। बच्चों को ब्रश करने की सही तकनीक की जानकारी न होना और बार-बार मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन से यह समस्या बढ़ती जा रही है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि पहले की अपेक्षा इस रोग में काफी कमी आई है।, लेकिन लंबे के समय के लिए इस रोग को दूर करना है तो बच्चों को हेल्थ प्रोग्राम के प्रति जागरूक करना होगा।
डॉक्टरों की मानें तो बच्चों में दूध के दांत आने के बाद यह समस्या शुरू हो जाती है। अगर बच्चा मीठे पदार्थों का सेवन शुरू कर दे तो तीन साल के बच्चों में यह समस्या शुरू हो जाती है। वहीं बारह साल तक ही बच्चों के दूध के दांत होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस दौरान दांत सड़ जाए तो कोई चिंता नहीं होती है। बारह साल के बाद जब बच्चों के नए दांत आते हैं तो यह पक्के दांत होते हैं। ऐसे में इसके बाद दांतों में यह रोग हो जाए तो यह जीवन भर चलता है।