अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर के लोगों को सप्लाई होने वाले गुम्मा परियोजना के पानी के सैंपल फेल हो गए हैं। संजौली स्थित जल भंडारण टैंक से लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट के अनुसार यह पानी को पीने लायक नहीं है। हालांकि, निगम प्रशासन का कहना है कि पुरानी पाइपलाइन के चलते कई बार पानी के सैंपल खराब आ जाते हैं। संजौली स्थित टैंक में पानी की पूरी क्लोरीनेशन की जाती है और इसके बाद ही शहर भर में इसकी सप्लाई होती है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं। निगम ने दस मई को टैंक से सैंपल लिए थे। सोमवार को इसकी रिपोर्ट आई।
इसमें स्पष्ट किया गया है कि यह पानी पीने लायक नहीं है। रिपोर्ट के बाद निगम ने पंपिंग स्टेशन पर ही क्लोरीनेशन सही करने के निर्देश भी दे दिए हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि सैंपल टैंक में पहुंचे पानी के हैं। टैंक में रोजाना क्लोरीनेशन होती है। इसके बाद ही लोगों की इसकी सप्लाई दी जाती है। निगम का दावा है कि टैंक से सप्लाई हो रहे पानी के सैंपल भी लिए गए हैं जो ठीक पाए गए हैं।
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पुरानी पाइपलाइन होने से समस्या
संजौली टैंक में पहुंचने से पहले इस परियोजना का पानी मशोबरा, ढली आदि इलाकों में भी सप्लाई होता है। आशंका है कि कहीं इन इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई तो नहीं हो रही। हालांकि, निगम साफ पानी सप्लाई करने के दावे कर रहा है। इस परियोजना की पाइपलाइन काफी पुरानी है। नई लाइन बिछाने का काम चल रहा है। गुम्मा पंपिंग स्टेशन पर भी क्लोरीनेशन होती है। लेकिन लोहे की पुरानी जंग लगी पाइप से संजौली पहुंचने तक कई बार पानी गंदा हो जाता है।
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शहर की दूसरी बड़ी परियोजना
यह गिरि के बाद दूसरी बड़ी परियोजना है। शहर को रोजाना 10 से 15 एमएलडी पानी की सप्लाई इस परियोजना से मिलती है। शहर में इससे पहले राजभवन और आईजीएमसी के टैंक समेत कई बावड़ियों के सैंपल फेल हो चुके हैं।
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टैंक से लिए पानी के सैंपल फेल
संजौली स्थित टैंक से लिए गए पानी के सैंपल फेल हुए हैं। लेकिन इस टैंक में क्लोरीनेशन और ट्रीटमेंट के बाद ही लोगों को पानी की सप्लाई दी जाती है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं, घरों में आ रहा पानी स्वच्छ है।
विजय गुप्ता, निगम अभियंता।