शिमला। टीबी रोगियों का डाटा नहीं रखा तो केमिस्ट नपेंगे। ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट 1940 के नियमों का उल्लंघन करने वाले जिला सहित शहरों में टीबी की दवाएं बेचने वाले केमिस्ट संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संचालक को नोटिस और लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान भी होगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डॉ. नीरज मित्तल ने इस बात की पुष्टि की है।
जिे में करीब 400 केमिस्ट मरीजों को दवाइयां देते हैं। अब तक महकमे के पास यह पुख्ता जानकारी नहीं है कि इनमें से कौन से संचालक मरीजों को यह दवाएं बेच रहे हैं। ऐसे में अब केमिस्टों के साथ बैठक कर उन्हें यह डाटा देने को कहा गया है। स्वास्थ्य महकमे के सीएमओ और ड्रग इंस्पेक्टर की टीम ने बीते दिनों केमिस्ट यूनियनों के साथ की। इस बैठक में फरवरी माह तक सभी संचालकों को रिकॉर्ड देने की बात कही गई है। वीरवार तक महकमे के पास करीब 12 केमिस्ट संचालकों का रिकॉर्ड पहुंच चुका है।
तो क्यों लेना पड़ा फैसला
टीबी से ग्रस्त कई मरीज निजी क्लीनिकों में जाकर उपचार करते है। डॉक्टर मरीजों को टीबी की दवाएं लिख देते हैं। मरीज यह दवाएं बाहर से लेते हैं। केमिस्ट से दवाएं लेने वाले मरीजों का रिकॉर्ड महकमे के पास नहीं होता है।
चौदह तरह की दवाएं दी जाती है रोगियों को
शिमला। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चौदह प्रकार की दवाएं टीबी के मरीजों को दी जाती है। इन्हीं दवाओं से मरीजों को यह कोर्स करवाया जाता है।
2016 में राज्य में करीब 16 हजार टीबी रोगी
स्वास्थ्य महकमे के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में पूरे राज्य में टीबी रोगियों की संख्या सोलह हजार के करीब है। जबकि 30 नवंबर 2017 तक जिला में टीबी रोगियों का आंकड़ा 1530 है।