सातवें वेतन आयोग के चलते वन रैंक वन पेंशन की शर्तों के कारण पूर्व सैनिक परेशान हैं। वन रैंक वन पेंशन को लेकर पूर्व सैनिकों के पास दो विकल्प हैं। पहला 2.57 के अनुपात से पेंशन और दूसरा 3 फीसदी सर्विस इन्क्रीमेंट का विकल्प। पूर्व सैनिकों को पहली अगस्त से सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलेगा जबकि एक सितंबर से बकाया एरियर।
हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक लीग ने सातवें वेतन आयोग से वन रैंक वन पेंशन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चर्चा की। एक्स सर्विस मैन लीग के वाइस चेयरमैन कर्नल एसकेएस चंबियाल ने बताया कि 2.57 के अनुपात से पेंशन में बढ़ोतरी तर्कसंगत है जबकि दूसरे विकल्प पर भी काम होना चाहिए।
तीन फीसदी सर्विस इन्क्रीमेंट से पूर्व सैनिकों को कई तरह के वित्तीय लाभों से वंचित रहना पड़ सकता है। चूंकि, सेना में रहते हुए कई पूर्व सैनिकों ने दो तो कइयों ने तीन से चार इन्क्रीमेंट ली हुई हैं। इससे तीन फीसदी सर्विस इन्क्रीमेंट का विकल्प तर्कसंगत नहीं है। पूर्व सैनिकों को इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है। कर्नल चंबियाल ने नंबर एक विकल्प को ही पूर्व सैनिकों के लिए तर्कसंगत और फायदेमंद बताया।