हिमाचल में पिछले दस साल के दौरान निजी अस्पताल, क्लीनिक और स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या सात गुना तक बढ़ गई है। सरकार नए संस्थान खोलने पर जोर तो दे रही है, लेकिन उनमें सुविधाएं नहीं दे पा रही है। शायद यही कारण है कि प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल संस्थानों में 67 फीसदी निजी स्वास्थ्य संस्थान हैं।
प्लानिंग बोर्ड की बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डा. श्रीकांत बाल्दी की ओर से जो प्लानिंग को लेकर रिपोर्ट सौंपी गई है, उसने सरकार के सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2007 में सूबे में विभिन्न तरह के निजी संस्थानों की कुल संख्या 35 थी।
इसमें अस्पतालों की संख्या 24 थी, लेकिन साल 2016 तक यह बढ़कर 187 हो गई। इसी तरह नर्सिंग कॉलेज और नर्सिंग/एएनएम स्कूलों की संख्या में भी कई गुना का इजाफा हुआ है। वहीं, सरकार नए पीएचसी-सीएचसी तो खोल रही है, लेकिन उनमें काम करने वाले कर्मचारियों को तैयार करने वाले नर्सिंग कॉलेजों और नर्सिंग/एएनएम स्कूलों की संख्या को नहीं बढ़ा सकी।