इसी वित्तीय वर्ष में करीब 6 हजार करोड़ रुपये तो ऋण की अदायगी में ही खर्च किए जाने हैं। केंद्र सरकार से एक और राहत ब्याजमुक्त कर्ज के रूप में 800 करोड़ रुपये की मिली तो उसका ठीक से उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह बजट केंद्र सरकार से वित्तपोषित विभिन्न योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए दिया गया है। ये योजनाएं विभिन्न विभागों से संबंधित हैं। जैसे-जैसे इन स्कीमों के लिए पिछले मंजूर बजट के यूसी केंद्र को भेजे जाएंगे, वैसे-वैसे ही वहां से अगला बजट भी रिलीज होगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना ने पुष्टि की है कि राजस्व, लोक निर्माण, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, परिवहन और शहरी विकास विभागों से पिछले स्वीकृत बजट के यूसी नहीं मिलने से ब्याजमुक्त ऋण के 664 करोड़ रुपये नहीं मिल पा रहे हैं। इसके लिए सरकारी विभागों को बार-बार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं।