जिले के लाखों लोगों के लिए खुशखबरी है। राजस्व विभाग मुस्साबी और नकल को ऑनलाइन करने जा रहा है। इसके लिए विभाग ने औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इससे किसानों को पटवारी और तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर काटने से निजात मिलेगी। जिले के लाखों किसानों को तहसील कार्यालय, लोकमित्र केंद्रों के अलावा घर बैठे ही चंद मिनटों में इंटरनेट के माध्यम से अपने जमीन की नकल मिल जाएगी।
राजस्व विभाग नया साल शुरू होने से पहले ही जिला वासियों को मुस्साबी को डिजीटिकरण करने की सौगात देने जा रहा है। इससे किसानों को बैंकों से लोन, कोर्ट कचहरी, बंदोबस्त, प्रोजेक्ट का सर्वे, भूमि का पता, क्षेत्रफल, भूमि स्थानांतरण और जमीन की खरीददारी के दौरान उपयोग में लाई जाने वाली मुस्साबी को चंद मिनट में हासिल कर सकेंगे।
यही नहीं लोग घर बैठे ही कंप्यूटर पर ऑनलाइन के जरिए मुस्साबी को हासिल कर सकेंगे। इससे किसानों को तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। समय की भी बचत होगी। इसके अलावा विभाग के पास भी कंप्यूटर के माध्यम से मुस्साबी का कार्य सुरक्षित रहेगा। विभाग 2015 से मुस्साबी डिजीटिकरण का कार्य कर रहा है। वहीं मौजूदा समय में मुस्साबी डिजीटिकरण का कार्य आखिरी चरण में चल रहा है।
क्या है मुस्साबी
राजस्व विभाग के सरकारी और निजी भू मालिकों की जमीन का रिकार्ड मैप के तौर रखा जाता है। मुस्साबी में जमीन को अंकित किया है। इसमें जमीन का स्वरूप क्या है दर्शाया होता है। इसमें भू मालिकों को अपनी जमीन का स्वरूप, रकबे का पता, गैर मुमकिन और घासनी का पता चलता है।
क्यों पड़ती है मुस्साबी की जरूरत
किसानों को बैंकों से लोन, कोर्ट कचहरी, बंदोबस्त, भूमि स्थानांतरण और जमीन की खरीददारी के लिए मुस्साबी की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा लोग घर बैठे कंप्यूटर के माध्य से अपनी जमीन की सूचना प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को मुस्साबी के अलावा ततीमा की सुविधा भी ऑनलाइन मिलेगी। इससे लोगों को पटवारी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही घंटों इंतजार करना पड़ेगा।
कंप्यूटर में सुरक्षित रहेगा रिकार्ड
विभाग के पास दशकों से भूमि का रिकॉर्ड कागजों में पड़ा है। कंप्यूटर के माध्यम से अब लोगों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। कई सालों से विभाग के पास पड़ा रिकॉर्ड ऐसे दीमक लगने से खराब हो जाता था, लेकिन अब कंप्यूटर से यह काफी सालों तक सुरक्षित रहेगा।