लोगों ने रेलवे पर उचित मुआवजा राशि अदा न किए जाने पर अदालत में अपील दायर की थी। निचली अदालत ने निर्णय लोगों के हक में दिया था। रेलवे ने इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। वहां भी दिलवां, ठठल और त्यूड़ी के प्रभावित लोगों के हक में निर्णय को बरकरार रखा।
इसमें एक फैसला 2015 और दो 2018 के हैं। करीब 60 लाख मुआवजा राशि की अदायगी नहीं हो पाई। अदालत ने सख्ती दिखाते हुए राजस्व विभाग से रेलवे की संपत्ति नीलाम करके प्रभावितों के मुआवजा राशि अदा करने को कहा था।
मुआवजे संबंधी मामले में ही इससे पूर्व अदालत ने ऊना के रेलवे स्टेशन को सील किया था। इससे कई रूट प्रभावित हो गए थे। यहां तक कि हिमाचल एक्सप्रेस ट्रेन को भी जब्त करने के आदेश जारी किए गए थे। बाद में रेलवे की ओर से राशि अदा किए जाने पर अदालत ने इसे कुछ घंटों के बाद रिलीज कर दिया था।