बिजली बोर्ड द्वारा काम करते समय हादसे के शिकार होने वाले कर्मचारियों के परिजनों को तीन माह के भीतर करुणामूलक आधार पर नौकरी दी जाएगी। मंगलवार को राज्य सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरुण श्रीधर की अध्यक्षता में हुई बोर्ड के निदेशक मंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया।
बीते साल सुंदरनगर में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा को पूरा करते हुए निदेशक मंडल ने मृतक कर्मचारी के परिवार को अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव पर भी मंजूरी लगाई। निदेशक मंडल की बैठक में फैसला लिया गया कि बिजली बोर्ड में लाइन, उपकेंद्र और परियोजनाओं में कार्य करते समय कर्मचारियों की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 5 से 10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि तुरंत प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा परिवार के किसी एक सदस्य को तीन महीने के भीतर नौकरी दी जाएगी या मृत कर्मचारी की सेवानिवृत्त आयु तक उस द्वारा लिए जा रहे वेतन की राशि बराबर विशेष पेंशन दी जाएगी। इन दोनों विकल्पों में किसी एक का चयन मृत कर्मचारी के परिवार की स्वेच्छा से होगा। निदेशक मंडल ने मानवरहित और नवनिर्मित 33 केवी, 66 केवी और 220 केवी विद्युत उप केंद्रों के लिए सब स्टेशन स्टाफ की विभिन्न श्रेणियों के 550 पदों को सृजित करने का फैसला भी लिया।
बैठक में बिजली बोर्ड के 2500 से अधिक कर्मचारियों को पेश आ रही वेतन विसंगति की समस्या को दूर करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी भी दी गई। हालांकि इस मामले को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। बिजली बोर्ड में कर्मचारियों के 48 श्रेणियों के वेतनमानों को बिजली बोर्ड प्रबंधन वर्ग ने अक्तूबर 2013 में बदल दिया था। इस कारण कर्मचारियों के संशोधित वेतनमानों में विसंगतियां आ गई थी।
कर्र्मचारियों से रिकवरी भी हुई। वेतन में 100 से 400 रुपये का नुकसान कर्मचारियों को उठाना पड़ा। बोर्ड प्रबंधन अगर इस वेतन विसंगति को दूर करता है तो बोर्ड पर सालाना छह करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरुण श्रीधर ने बताया कि वेतन विसंगति मामले पर जल्द फैसला ले लिया जाएगा।
निदेशक मंडल की बैठक में बिजली बोर्ड के प्र्रबंध निदेशक पीसी नेगी सहित सभी निदेशक मौजूद रहे। उधर, बोर्ड की इंप्लाइज यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने यूनियन के सुंदरनगर में आयोजित हुए अधिवेशन में मुख्यमंत्री द्वारा की गई अधिकांश घोषणाओं को पूरा करने पर बोर्ड प्रबंधन का आभार जताया है।