इन पदों के लिए केवल सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को ही पात्र माना जाएगा। इससे अनुभवी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं फिर से संस्थानों को मिल सकेंगी। खासतौर पर विशेषज्ञ विषयों में फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए यह फैसला लिया गया है। मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों की कमी के चलते पढ़ाई और मरीजों के उपचार दोनों प्रभावित हो रहे थे, जिसे अब दूर करने की दिशा में यह पहल की गई है। चयनित प्रोफेसरों को प्रति माह 2.50 लाख रुपये तक का वेतन दिया जाएगा।
नियुक्ति के लिए उन्हें एक अंडरटेकिंग भी देनी होगी। यह व्यवस्था अनुबंध के आधार पर होगी और निर्धारित अवधि के लिए ही सेवाएं ली जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने योग्य उम्मीदवारों से समय रहते आवेदन करने की अपील की है, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी कर इन पदों को भरा जा सके। सरकार की यह पहल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्वास्थ्य सचिव एम सुधा ने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में सेवानिवृत्त प्रोफेसर की तैनाती की जा रही है। इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं। आईजीएमसी और टांडा को छोड़कर अन्य मेडिकल कॉलेजों में यह तैनाती की जानी है।
कुल्लू ने प्रदेश के 11 जिलों को पीछे छोड़ा है। पहले चरण में दूसरे स्थान पर शिमला और तीसरे स्थान पर मंडी रहा है। कुल्लू में 413, शिमला में 284 और मंडी में 282 किशोरियों को एचपीवी का टीका लगाया गया है। पहले चरण में प्रदेशभर में 2,522 किशोरियों की वैक्सीनेशन हुई है। हालांकि, पांच अप्रैल को प्रदेश के सभी जिलों में दूसरा चरण जारी रहा। इसमें भी किशोरियों ने वैक्सीनेशन में उत्साह दिखाया है।