भाजपा पार्षदों की बगावत से मचे सियासी घमासान के बीच महापौर और उप महापौर की कुर्सी अब सदन के भरोसे टिक गई है। इस महीने होने वाली नगर निगम की मासिक बैठक तय करेगी कि दोनों अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या नहीं।
महापौर और उप महापौर के खिलाफ लिखित पत्र में सरकार को शिकायत देने वाले ग्यारह में से कई पार्षद सदन का बहिष्कार करने पर अड़ गए हैं। इनका कहना है कि जब तक नए मेयर और डिप्टी मेयर नहीं चुन लिए जाते, वे सदन में नहीं जाएंगे। निगम में कुल 34 पार्षद हैं।
इनमें भाजपा के 19 पार्षद हैं। यदि 19 में से शिकायत सौंपने वाले 11 पार्षद बैठक से गायब रहते हैं तो सदन ठप हो जाएगा। 15 विपक्षी पार्षदों के बीच मेयर-डिप्टी मेयर अकेले जनता से जुड़े कोई फैसले नहीं ले सकते।
मजबूरन सरकार और संगठन को कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है। वहीं, यदि मेयर-डिप्टी मेयर इन पार्षदों को सदन में ले जाने में कामयाब होते हैं तो इनकी कुर्सी पर मंडराया खतरा टल सकता है।
पार्षद बोलीं- हम सदन में नहीं जाएंगे, कुर्सी छोड़े मेयर
मेयर-डिप्टी मेयर के खिलाफ लिखित शिकायत देने वाले 11 पार्षदों में से एक पार्षद आरती चौहान ने कहा कि हम सदन का बहिष्कार करेंगे। मेयर को अब खुद भी समझ जाना चाहिए कि उनके साथ कोई काम करना नहीं चाहता।
उन्हें नैतिकता के आधार पर खुद पद छोड़ देना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया तो हम इस महीने मासिक बैठक में नहीं जाएंगे। उधर, पार्षदों की शिकायत से जुड़ी रिपोर्ट शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री को सौंप दी है। सदन के बाद बड़ा बदलाव हो सकता है।
पार्षदों को मनाने के लिए नेताओं का सहारा
मासिक बैठक 30 जून या इससे पहले करवाना अनिवार्य है लेकिन आपसी खींचतान के चलते बैठक की तारीख अभी तय नहीं हो पाई है। वहीं, नाराज पार्षदों को मनाने के लिए अब भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस नेताओं का भी सहारा लिया जा रहा है। नेताओं को इनसे जुड़े पार्षदों को फोन करवाकर उन्हें राजी करने का भी प्रयास चल रहा है।