अमर उजाला ब्यूरो
बद्दी (सोलन)। देश के सबसे बड़े वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने न केवल उद्योग जगत को राहत पहुंचाई है, बल्कि आम लोगों के लिए भी जीएसटी सौगात लेकर आया है। सबसे अधिक दिक्कत लोगों को दवाएं खरीदने की होती है। जीएसटी के लागू होने से कैंसर जैसी कई बड़ी घातक बीमारियों की दवाइयां अब लोगों की पहुंच में आ जाएंगी।
राष्ट्रीय दवा मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) द्वारा जारी सूची में 814 ऐसी दवाओं की सूची जारी कर दी गई है, जिसके तहत लोगों को दवाएं सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगी। इस जारी सूची में आईवी फ्लयूड, एंटीबायोटिक, कैंसर, एचआईवी, टीबी जैसी घातक बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। इनके दामों में एनपीपीए द्वारा 0.95905 की कटौती की गई है और इसकी सूची भी जारी कर दवा निर्माताओं को दे दी है।
एनपीपीए द्वारा कम की गई कीमतों के तहत आईवी फ्लयूड, कैंसर रोगियों के उपचार के लिए प्रयोग में होने वाली ट्रैस्टूजूमैन इंजेक्शन, दिमाग के कैंसर वाली टैमोजोलोमिड कैप्सूल, पागलपन के लिए लिमोफोमा मेंटल सेल को नियंत्रण करने वाले बोस्टेजोमिब पाउडर आदि के दामों में कटौती की गई है। टै्रस्टूजुमैन इंजेक्शन की कीमत अब 54,582 रुपये प्रति पैक होगी, जो पहले 56,912 रुपये प्रति पैक होती थी। टैमोजोलोमिड कैप्सूल अब 4254 रुपये में मिलेगा, जो कि पहले 4434 रुपये मिलता था। जैमिस्टेबिन पाउडर अब 4813 में मिलेगा, जो पहले 5019 रुपये में मिलता था। बोस्टैजोमिब पाउडर अब 11,160 रुपये मिलेगा, जो पहले 11,630 रुपये में मिलता था। एनपीपीए के निदेशक एपीएस स्वाहन के अनुसार देशभर में दवाइयों की कीमतों का निर्धारण कर इसकी सूची दवा निर्माताओं को जारी हो गई है।
हिमाचल दवा निर्माता संघ के अध्यक्ष एमबी गोयल ने कहा कि उद्योग जगत और आम लोगों के लिए जीएसटी हितकर है। उन्होंने कहा कि दवाओं की कीमतें कम होने से निश्चित तौर पर लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
सहायक दवा नियंत्रक नवनीत मरवाहा ने कहा कि समय-समय पर एनपीपीए दवाओं की कीमतों का निर्धारण करता है। अधिसूचना जारी होने के बाद इसके आदेशों का उद्योगों को अनुपालन करना होता है।