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राजधानी में पीलिया बेकाबू, 42 नए मामले

Sun, 17 Jan 2016 11:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राजधानी में पीलिया से हो रहीं मौतों को देख स्थिति काबू से बाहर होती जा रही है। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य महकमा अभी तक इस जानलेवा बनते जा रहे रोग की रोकथाम को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा। रोजाना बढ़ रहे रोगियों के आंकड़ों के बावजूद अस्पतालों में अभी तक स्थिति को मानीटर करने और टेस्ट के साथ तुरंत उपचार के लिए खास व्यवस्था नहीं की गई है।
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पीलिया रोगियों को भी अन्य रोगियों की तरह नियमित उपचार नसीब हो रहा है। उधर, नगर निगम और आईपीएच मामले को लेकर बयानबाजी और ट्रीटमेंट प्लांट के दौरे तक ही सीमित हैं। आलम यह है कि लोगों को मजबूर बावड़ियों का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्वास्थ्य महकमे को चाहिए था कि वह मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष व्यवस्थाएं करता।

आईजीएमसी में भी मुफ्त टेस्ट की घोषणा जरूर हुई, लेकिन वह भी सिर्फ दो बजे तक ही हो रहे हैं। कमेटी भी बनी, पर जमीनी स्तर पर काम नहीं हुआ। उधर, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में शनिवार को पीलिया के 26 नए मामले सामने आए। अस्पताल में छोटा शिमला, खलीणी, न्यू शिमला और मैहली से यह मामले सामने आए। वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर रंजना राव ने पुष्टि की है। उधर, आईजीएमसी में भी पीलिया के 16 नए मामले सामने आए हैं।
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बावड़ी नहीं, नल के पानी से डर लगता है साहब!
बेशक सीवरेज की शिकायत आने के बाद अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई बंद कर दी है। बावजूद इसके पीलिया के रोगी अस्पताल पहुंच रहे हैं। मरीजों का यह आंकड़ा अब साढ़े छह सौ के पार जा पहुंचा है। जबकि इनमें से एक महिला और एक बच्चे की हाल ही में मृत्यु हो चुकी है।

हालत यह है कि लोगों का विभाग द्वारा की जा रही पानी की सप्लाई से विश्वास उठ गया है। लोग उन बावड़ियों का पानी पीने को मजबूर हैं जहां का पानी पीने लायक नहीं है। ‘अमर उजाला’ की टीम ने टॉलैंड स्थित बावड़ी, कनलोग, बीयरखाना, लोअर विकासनगर और आंजी में का दौरा किया।

पड़ताल में सामने आया कि वहां के लोग बावड़ियों का पानी पी रहे हैं, जबकि वहां बड़े अक्षरों में लिखा गया है कि ‘यह पानी पीने योग्य नही है’। लोगों ने बताया कि विकासनगर के लोगों को अश्वनी खड्ड से पेयजल आपूर्ति दी जाती थी।

इसी कारण यहां सबसे ज्यादा लोग पीलिया की चपेट में आए हैं। सप्लाई बंद होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में पीलिया के रोगी अस्पताल पहुंच रहे है। इस कारण अभी भी लोगों का विश्वास सप्लाई पर नहीं है। इसलिए वह बावड़ियों का पानी पी रहे हैं।

ढाबों पर बावड़ियों के पानी का प्रयोग: टॉलैंड बावड़ी के पास बने ढाबे पर बावड़ियों के पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। ढाबा चला रहे युवक ने बताया कि इस बावड़ी से रोजाना कई लोग पानी पीते हैं। खाना खाने और चाय पीने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग उनके ढाबे पर आते हैं।

लेकिन कभी कोई बीमार नहीं हुआ। जबकि उसी बावड़ी की दीवार पर बड़े अक्षरों में लिखा है कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में भी पीलिया रोगियों रोग के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा थी।

बावड़ी में दिखी गाद और कागज: ‘अमर उजाला’ की टीम जब बियरखाना बावड़ी के पास पहुंची तो वहां पर बावड़ी बनाने वाले कांट्रेक्टर भगत राम भी मौजूद थे। उनके साथ धनी राम, शेर सिंह, केशव और अकबर ने बताया कि यहां रहने वाले कई लोग इसी बावड़ी का पानी उपयोग में लाते हैं।

यह पानी पूरी तरह साफ है। लेकिन जब बावड़ी का दरवाजा खोला गया तो पाया कि भारी मात्रा में गाद और कागज थे। दोपहर एक बजे, स्थान आंजी बावड़ी: दोपहर एक बजे बावड़ी के

पास कपड़े धो रही सत्या देवी, सुरेंद्र ने कहा कि शहर में पीलिया रोग फैलने के बाद सप्लाई बंद कर दी थी, लेकिन अब यहां के पानी को भी वह उबाल कर पी रहे हैं। कहा कि यह पानी पीने योग्य है।
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