शहर के सबसे पुराने वार्डों में शुमार बालूगंज वार्ड में आज भी जनता सफाई और पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। वार्ड में सफाई व्यवस्था ठप हो चुकी है। कूड़ेदान की शिकायतों के बावजूद सफाई नहीं हो रही। कई लोग पार्षद से भी नाराज है। इनका कहना है कि पार्षद चुनाव के बाद उनके इलाके में नहीं आईं।
अब तक शिकायतें भी नहीं सुनी जा रही हैं। बालूगंज में एक भी बड़ी पार्किंग नहीं। मजबूर लोग सड़क किनारे गाड़ियां पार्क कर रहे हैं। लोअर चक्कर में शौचालय और स्ट्रीट लाइटों की दिक्कत है तो चक्कर और बालूगंज में ट्रैफिक बढ़ने से दुकानदारों का कारोबार ही ठप हो गया है। बाजार में गाड़ी रुकने तक की जगह नहीं। ड्रेनेज सिस्टम में भी सुधार की जरूरत है।
रविवार को अमर उजाला की टीम ने वार्ड का दौरा किया तो लोगों ने कई बड़ी समस्याएं रखीं। कहा कि टैक्स वसूलने के बदले नगर निगम कम से कम मूलभूत सुविधाएं तो उन्हें दें।
लोगों से बातचीत
1. एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं
लोअर चक्कर में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। इस कारण दुकानदारों को परेशानी हो रही है। कई खतरनाक पेड़ भी यहां हैं। शिकायत के बावजूद इन्हें नहीं काटा जा रहा।
-देसराज
2. शाम छह बजे के बाद नहीं मिलती बस
शाम छह बजे के बाद चक्कर के लिए कोई बस सेवा नहीं। जो लांग रूट की बसें चलती हैं, वे यहां रुकती नहीं। सुबह भी नौ बजे के बाद यहां से कोई बस नहीं चलती।
-नारायण दास
3. स्ट्रीट लाइटें खराब, पार्क तक नहीं
इस वार्ड में कई स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। हमारे लिए न तो कोई पार्क है और न ही पार्किंग। बच्चों के खेलने के लिए कोई मैदान भी नहीं है। सुबह शाम जाम लगा रहता है।
-ललित मेहता
4. बंद कर दी टैक्सी, महिलाएं-बुजुर्ग परेशान
चक्कर के लिए पहले टैक्सी चलती थी, जो अब बंद कर दी है। दो टैक्सियां कोर्ट के लिए चलती हैं, लेकिन वे कोर्ट परिसर से ही फुल हो जाती हैं। इस कारण महिलाएं और बुजुर्ग परेशान हैं।
-लज्जा देवी
5. ट्रैैफिक ऐसा कि कारोबार ही ठप हो गया
कोर्ट परिसर के लिए ज्यादातर गाड़ियां चक्कर रोड से आने लगी हैं। ट्रैफिक इतना बढ़ गया है कि कोई बाजार में खड़ा नहीं हो पाता। गाड़ियां दूसरे रास्ते से चलाई जानी चाहिए।
-अशोक शर्मा
6. चक्कर में उल्टा है ट्रैफिक सिस्टम
सुबह शिमला जाने और शाम को चक्कर आने के लिए बसें नहीं मिलती। ट्रैफिक सिस्टम उल्टा है। सुबह नौ बजे तक चक्कर को खूब बसें चलती हैं, लेकिन सवारी नहीं होती।
-हरि ठाकुर
7. पार्षद फेल, शिकायतें तक नहीं सुनते
महीने में एक बार कूड़ा उठता है। पार्षद को कई बार शिकायत की, लेकिन वे चुनाव के बाद कभी नहीं दिखीं। हमारी एक ही मांग थी, जो पूरी नहीं हुई। विकास करवाने में पार्षद फेल हो गई हैं।
-रामपाल
8. अधिकारी सुस्त, किससे करें शिकायत
कामना देवी के पास लगा कूड़ेदान साफ नहीं होता। कई बार शिकायतें की, लेकिन कोई नहीं सुनता। कूड़े से बंदरों का आतंक ऐसा बढ़ गया है कि बच्चे स्कूल नहीं जा पातेे।
- मधु कौशल
9. रास्ते पर फैली गंदगी से हो रही परेशानी
घरों और कूड़ेदान से नियमित कूड़ा नहीं उठाया जा रहा। बंदर रोज स्थानीय लोगों को काट रहे हैं। हमारी मांग है कि इस कूड़ेदान को शिफ्ट किया जाए। जनता परेशान हो गई है।
- नीलम गौतम
10. पार्किंग नहीं, एंबुलेंस तक नहीं चल पाती
वार्ड में पार्किंग नहीं है। सड़क किनारे अवैध पार्किंग हो रही है। कई जगह हालत ऐसी है कि एंबुलेंस तक नहीं चल पाती। बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में दिक्कत होती है।
- सुरेश कुमार
11. सुधरनी चाहिए व्यवस्था
सफाई व्यवस्था सुधरनी चाहिए। नगर निगम को लोगों की शिकायतें सुननी चाहिए। यदि बड़ी गाड़ियां नहीं आ पाती तो छोटी गाड़ी से कूड़ेदान साफ करवाए जा सकते हैं।
- अभिराम
12. हफ्ते में एक बार उठता है कूड़ा
टाइप फोर में रोज कूड़ा नहीं उठता। बाकी ब्लॉकों में भी यही हाल है। सड़कें और रास्तों की हालत भी नहीं सुधर रही। मंदिर जाने वाले रास्ते की नियमित सफाई जरूरी है।
- अपर्णा