जिला परिषद की बचत भवन में आयोजित बैठक में चिट्टे का मुद्दा गूंजा रहा। सदस्यों ने कहा कि ऊपरी शिमला सहित जिले में इस नशे ने युवा बर्बाद कर दिए हैं। बैठक में 47 प्रस्तावों पर चरचा की गई। बैठक की अध्यक्षता जिप उपाध्यक्ष सुरेंद्र रेटका ने की। बैठक का संचालन अतिरिक्त उपायुक्त देव श्वेता बनिक और जिला पंचायत अधिकारी विजय बरागटा ने किया।
जिला परिषद सदस्यों ने बढ़ रहे चिट्टे के काले कारोबार को लेकर पुलिस महकमे पर सीधे आरोप लगाए। कहा कि पुलिस महकमा चिट्टे की तस्करी रोकने में नाकाम रहा है। आरोप यहां तक लगे कि युवाओं को बर्बाद करने वाले इस कारोबार को पुलिस के कुछ अपने कर्मी ही संरक्षण दे रहे हैं। सदस्य नीलम सरईक और रेखा मोक्टा, गिरधारी लाल और राजेश शर्मा ने कहा कि पुलिस सिर्फ कमेटियां गठित करके पल्ला झाड़ रही है।
ऊपरी शिमला के गांवों में युवाओं को यह नशा बर्बाद कर रहा है। सदस्यों ने ठियोग, रामपुर और रोहड़ू जैसे क्षेत्रों में नशा मुक्ति केंद्र खोलने की मांग उठाई। एडीसी ने पुलिस अधिकारियों से अगली बैठक में नशा रोकने को लेकर की कार्रवाई का ब्यौरा लाने को कहा। रेखा मोक्टा ने कहा कि सैंज में नशा कारोबार रोकने को पुलिस चौकी खोलने की वह लगातार मांग कर रही हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ।
यहां चार सड़कें मिलती हैं जहां से नशे की सप्लाई सभी जगहों को होती है। बैठक में मनरेगा की वर्ष 2018-19 की अनुपूरक और 2019-20 की पंचायतों की ब्लॉक के माध्यम से आई करोड़ों की शेल्फ को मंजूरी प्रदान की। बैठक में पेयजल, बस सुविधा, लावारिस कुत्तों के आतंक से निजात दिलवाने जैसे मामले उठाए गए।
हिम ऊर्जा के अधिकारी ने बताया कि जिला के लिए दस हजार नई सोलर लाइटें मंजूर की गई हैं। इसमें सबसे पहले उन पंचायतों में बीस बीस लाइटें लगाई जाएगीं जिनमें अभी तक एक भी लाइट नहीं लगी है। उन्होंने लाइट लगवाने में जिला परिषद सदस्यों के लिए तीस फीसदी जारी किए जाने की बात भी कही।
सड़कों के ड्राफ्ट तैयार करें अधिकारी
शिमला। जिप बैठक में एडीसी ने लोनिवि के अधिशासी अभियंताओं को पीएमजीवाईएस दो (सड़क योजना) के ड्राफ्ट को तैयार करने कहा। निर्देश दिए कि ड्राफ्ट को संबंधित ब्लॉक की पंचायत समिति और जिला परिषद की बैठक से स्वीकृत करवाएं ताकि इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ सके। अधिकारी सड़कों के ड्राफ्ट तय मानकों के तहत ही तैयार करवाएं।
सदन में यूनिवर्सल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम के नाम पर ठगी का गुंजा मामला
शिमला। सदन में जिप सदस्यों नीलम, डीआर हास्टा और राजेश शर्मा ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम के नाम जिले की पंचायतों में एक-एक घर में जाकर निजी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने 400 रुपये प्रति परिवार फीस लेकर फार्म भरे। लेकिन आज तक इससे संबंधित कोई दस्तावेज उन्हें नहीं मिले। सदस्यों ने कहा कि यह करोड़ों का घोटाला है। इसका जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग तक को पता नहीं है। इसकी छानबीन की जाए। एडीसी ने देव श्वेता ने बीडीओ को हर ऐसी पंचायत के डाटा एकत्र कर सदन में पेश करने के निर्देश दिए।
शकराह स्वास्थ्य केंद्र का मामला भी उठा
सीएमओ ने हिम केयर, आयुष्मान योजनाओं की पात्रता और इसके लाभ से संबंधित जानकारी दी। सीएमओ ने सदस्य राजेश शर्मा के शकराह उपस्वास्थ्य केंद्र में ताला लगने के उठाए मामले पर भरोसा दिया कि जल्द वहां सप्ताह में कुछ रोज हेल्थ वर्कर बिठाकर सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। गौरतलब है कि इस मामले को अमर उजाला ने भी प्रमुखता से उठाया था।
फारेस्ट एक्ट की जिप बैठक में दी जानकारी
जिप बैठक में ग्रामीण विकास के कार्यों की जद में आने वाली सरकारी जमीन के मामलों को निपटाने पर भी चरचा हुई। बताया गया कि फारेस्ट राइट एक्ट 2006 के सेक्शन 3(2) के तहत एक एकड़ तक की भूमि और इसमें 75 पेड़ तक काटने की अनुमति लेने को ग्रामसभा के पारित प्रस्ताव की आवश्यकता रहती है। एडीसी देव श्वेता बनिक ने साफ किया कि आमतौर पर ग्रामसभा का मतलब पंचायत की ग्रामसभा से लिया जा रहा है, जबकि इस एक्ट के मुताबिक ग्रामसभा राजस्व गांव की ग्रामसभा है। इसमें 50 फीसदी लोगों के कोरम में पारित प्रस्ताव को आरओ के माध्यम से सीधे वन मंडल अधिकारी को भेजा जा सकता है।
अवैध खनन के चालान का ब्यौरा मांगा
जिप सदस्य रीना ठाकुर ने रामपुर और कुमारसैन में हो रहे अवैध खनन का मामला उठाया। इस पर संबंधित विभाग के अधिकारी को अगली बैठक में कार्रवाई का पूरा ब्योरा लाने को कहा गया। सदस्य का आरोप था कि रामपुर में करीब बीस अवैध खानें चल रही हैं। विभाग ने सिर्फ तीन को ही अनुमति दी है। अध्यक्ष सुरेंद्र रेटका ने उद्योग विभाग के अधिकारियों से पब्बर नदी के खनन को दी अनुमति का ब्यौरा भी मांगा। कहा कि इसमें संबंधित पंचायतों से एनओसी क्यों नहीं लिया। इस पर अधिकारी ने जवाब दिया कि माइनिंग के लिए जिसको कांट्रेक्ट मिलता है, वहीं एनओसी लेता है। विभाग को अनापत्ति लेने की आवश्यकता नहीं होती है।