शिमला के रिज मैदान पर पानी के टैंकर को भरते हुए।
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हिमाचल प्रदेश के दो जिलों शिमला और सोलन में पीने के पानी के लिए हाहाकार मच गया है। भीषण गर्मी के बीच दोनों जिलों के हजारों उपभोक्ताओं को पांचवें से सातवें दिन पानी मिल रहा है। हालात यह है कि जलशक्ति विभाग ने दोनों जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर टैंकरों से पानी देने की मंजूरी मांगी है।
विभाग ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए पेयजल परियोजनाओं को लेकर रिपोर्ट भी तैयार कर दी है। विभाग के अनुसार प्रदेश में कुल 10,067 पेयजल परियोजनाएं हैं। इनमें ज्यादातर में जलस्तर घट गया है। वहीं, 350 पेयजल परियोजनाएं ऐसी हैं जो लगातार सूख रही हैं। इनमें भी 165 परियोजनाएं ऐसी हैं जिनमें पानी का जलस्तर 80 फीसदी तक घट गया है। इन 165 में भी जिला शिमला और सोलन की 102 पेयजल परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें जलस्तर इतना कम हो गया है कि जलशक्ति विभाग के टैंक तक नहीं भर पा रहे हैं। लोगों को हफ्ते में एक बार पानी मिल रहा है। ये योजनाएं ज्यादातर ग्रामीण इलाकों की हैं। सोलन जिला के कसौली, धर्मपुर इलाके सबसे ज्यादा सूखे की चपेट में हैं। इसके अलावा शिमला के भट्ठाकुफर क्षेत्र में भी पेयजल योजनाएं लगभग ठप हो गई हैं।
अधिकारी चुनाव में, कैसे मिलेगी राहत
गहराते जलसंकट के बीच जलशक्ति विभाग के हाथ भी खड़े हो गए हैं। सूखते पेयजल स्रोतों से जनता को कैसे राहत दिलाए, यह समझ नहीं आ रहा। विभाग के ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी इन दिनों चुनाव ड्यूटी में हैं। ऐसे में वैकल्पिक स्रोतों से भी पानी उठाने के इंतजाम नहीं हो पा रहे हैं। विभाग का कहना है कि पेयजल स्रोतों में जितना भी पानी उपलब्ध है, उसे लोगों के लिए लिफ्ट किया जा रहा है। यदि गर्मी का कहर ऐसे ही जारी रहा तो आने वाले दिनों में हालात चिंताजनक होने वाले हैं।
विभाग लगातार पेयजल परियोजनाओं से पानी की पंपिंग बढ़ा रहा है, लेकिन गर्मी के कारण ज्यादातर परियोजनाओं में जलस्तर काफी कम हो गया है। प्रदेश में 350 परियोजनाएं सूखे की चपेट में हैं। कई इलाकों में टैंकरों से भी पानी की आपूर्ति देने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है-
अंजू शर्मा, प्रमुख अभियंता, जलशक्ति विभाग