हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में जलविद्युत पर संकेंद्रित बीटेक पाठ्यक्रम होंगे। इनमें मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस शामिल हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम में 60 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। कॉलेज हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध होगा।
पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम और पीएचडी कार्यक्रम भी चौथे, छठे वर्ष से सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम और प्रायोजित अनुसंधान कार्यक्रम के रूप में चलाया जाएगा। सरकार इसी साल से कॉलेज में कक्षाएं शुरू करने के प्रयास में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीरवार को शिमला में हुए समारोह में हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बिलासपुर का शिलान्यास किया। हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज की 146 करोड़ की लागत से स्थापना की जा रही है। इसमें 75 करोड़ का निवेश एनएचपीसी और एनटीपीसी की ओर से औद्योगिक भागीदारों के रूप में किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना को मुहाल बंदला तहसील सदर जिला बिलासपुर में 62.06 बीघा भू भाग दिया है। इंजीनियरिंग कॉलेज के खर्चों को चलाने के लिए एनएचपीसी और एनटीपीसी आवश्यकतानुसार 25 करोड़ तक के दूसरे अंशदान की किस्त जारी करने पर भी विचार करेंगे।
बीते साल नई दिल्ली में हिमाचल सरकार, एनएचपीसी और एनटीपीसी के बीच इसको लेकर एमओयू साइन हुआ था। यह संयुक्त उपक्रम का अपनी तरह का देश का पहला कॉलेज होगा। हिमाचल में हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना से विशेषज्ञ तकनीकी मानव संसाधन के सृजन में मदद मिलेगी।
भविष्य की कई हाइड्रो परियोजनाओं की विशिष्ट आवश्यकता के अनुकूल देश की सेवा करने वाले कार्यबल को तैयार करने में भी मदद मिलेगी। हिमाचल प्रदेश में 20,000 मेगावाट से अधिक की हाइड्रो पॉवर क्षमता है। देश में इसका लगभग 35 प्रतिशत भाग हिमाचल प्रदेश में ही उत्पादित होता है।
एनटीपीसी और एनएचपीसी राज्य में कई परियोजनाओं का संचालन करने तथा निर्माण करने में संलग्न हैं। हिमाचल के पहाड़ी राज्य होने के चलते उसे कालेज से खासा फायदा होगा। इससे राज्य को पनबिजली उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। विद्यार्थियों को पनबिजली के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए एक प्लेटफार्म भी मिलेगा। यह राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।